Last Updated: October 18, 2026

Dainik Savera Times Logo

Fake News के खिलाफ कानून ला रही कर्नाटक सरकार, 7 साल जेल और 10 लाख तक जुर्माना

June 22, 2025

Fake News के खिलाफ कानून ला रही कर्नाटक सरकार, 7 साल जेल और 10 लाख तक जुर्माना

नेशनल डेस्क : आज के डिजिटल दौर में सोशल मीडिया न सिर्फ जानकारी फैलाने का माध्यम है, बल्कि गलत खबरों (फेक न्यूज) के लिए भी सबसे बड़ा जरिया बन गया है। खासकर भारत में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। आए दिन सोशल मीडिया पर झूठी खबरें, एडिट किए गए वीडियो और भ्रामक बयान वायरल होते रहते हैं, जिससे समाज में भ्रम और तनाव की स्थिति बनती है। इसी को देखते हुए कर्नाटक सरकार इस पर सख्त कानून लाने जा रही है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

सरकार ला रही सख्त कानून

आपको बता दें कि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने एक विधेयक (Bill) पेश किया है, जिसका मकसद सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर फैलने वाली फेक न्यूज पर रोक लगाना है। इस कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत या झूठी खबर फैलाता है, तो उसे 7 साल तक की जेल और 10 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

भारत बना ‘फेक न्यूज की राजधानी‘

कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खरगे ने बताया कि भारत आज फेक न्यूज फैलाने के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर है। उन्होंने विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum) के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि भारत में सबसे ज्यादा गलत सूचना फैलती है, और यही देश में कानून-व्यवस्था की कई समस्याओं की जड़ बन चुकी है।

फेक न्यूज और मिसइन्फॉर्मेशन में क्या फर्क है?

-फेक न्यूज: जब कोई व्यक्ति जानबूझकर किसी गलत या झूठी सूचना को फैलाता है ताकि किसी की छवि खराब हो या किसी को नुकसान हो।

-मिसइन्फॉर्मेशन: जब कोई व्यक्ति किसी गलत जानकारी को अनजाने में आगे बढ़ा देता है, बिना यह जाने कि वह झूठी है — फिर भी इससे किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है।

कानून के अनुसार, दोनों ही मामलों में कार्रवाई हो सकती है, क्योंकि असर दोनों का एक जैसा ही होता है।

सोशल मीडिया पर निगरानी और दंड की व्यवस्था

कर्नाटक सरकार के प्रस्तावित कानून में यह कहा गया है कि अगर कोई व्यक्ति वीडियो, ऑडियो, टेक्स्ट या इमेज को एडिट करके किसी का गलत रूप में प्रचार करता है, तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। इसके तहत सोशल मीडिया पोस्ट, बयान, रिपोर्टिंग या कंटेंट को तोड़-मरोड़ कर पेश करने पर कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

3M: लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा

प्रियांक खरगे ने चुनाव आयुक्त और न्यायपालिका के हवाले से कहा कि 3M – Money (पैसा), Muscle (ताकत) और Misinformation (गलत सूचना) लोकतंत्र के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश भी इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि फेक न्यूज लोकतंत्र को कमजोर कर रही है।

क्या यह कानून जरूरी है?

वर्तमान समय में जब हर व्यक्ति के हाथ में एक स्मार्टफोन है और हर कोई कुछ न कुछ शेयर करता है, ऐसे में गलत जानकारी को रोकना बेहद जरूरी हो गया है। यह कानून सिर्फ अपराधियों को सजा देने के लिए नहीं, बल्कि लोगों को जागरूक करने और जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनाने के लिए भी लाया जा रहा है।

कर्नाटक सरकार का यह प्रस्तावित कानून एक जरूरी कदम है जो गलत जानकारी और अफवाहों पर रोक लगाने में मदद करेगा। अगर यह कानून पारित होता है और देश के अन्य राज्यों में भी इसे अपनाया जाता है, तो इससे सामाजिक तनाव, नफरत, और अफवाहों पर लगाम लगाई जा सकती है, और एक सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाया जा सकता है।

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें