
नेशनल डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को टीएमसी की शहीद दिवस रैली में बीजेपी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बीजेपी बंगाली भाषा और पहचान पर हमला कर रही है और अगर ऐसा चलता रहा तो विरोध की आग दिल्ली तक पहुंचेगी।
कोलकाता में भारी भीड़ को संबोधित करते हुए ममता ने कहा कि 2026 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को हराना जरूरी है। ममता बनर्जी ने कहा, “हम बंगाली अस्मिता (गौरव) की रक्षा के लिए लड़ेंगे। 27 जुलाई से राज्यभर में भाषा आंदोलन शुरू करेंगे।” उन्होंने लोगों से अपील की कि भाषा और संस्कृति की रक्षा के लिए एकजुट हों।
#WATCH | Kolkata, West Bengal | CM Mamata Banerjee says, “We respect all the languages, be it Hindi, Gujarati, Marathi, Rajasthani…The people of West Bengal played a big role in the Independence movement… No one else can do what the people of West Bengal can…”
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— ANI (@ANI) July 21, 2025
ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी बंगालियों पर भाषाई आतंकवाद थोप रही है।उन्होंने कहा कि एनआरसी के जरिए बंगालियों को परेशान किया जा रहा है। कई लोगों को डिटेंशन कैंप में डाला जा रहा है। वोटर लिस्ट से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने 2019 की उस घटना की भी याद दिलाई जब ईश्वर चंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी गई थी।
ममता ने असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा पर भी हमला किया। उन्होंने कहा, “हिमंत बिस्व सरमा अपने राज्य को नहीं संभाल पा रहे, लेकिन बंगाल के मामलों में दखल दे रहे हैं।” ममता ने टीएमसी नेता सुष्मिता देव से आग्रह किया कि वे असम में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करें। सीएम ममता ने कहा कि चुनाव आयोग (EC) भाजपा के इशारे पर काम कर रहा है।उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “अगर बिहार जैसी हरकत बंगाल में करने की कोशिश की गई, तो हम चुनाव आयोग का घेराव करेंगे।”
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी बीजेपी को आड़े हाथों लिया। उन्होंने बीजेपी को “बांग्ला विरोधी पार्टी” बताया। उन्होंने कहा, “बीजेपी चाहती है कि बंगालियों को डिटेंशन कैंप में डाला जाए, लेकिन हम 2026 में बीजेपी को ही बंगाल से बाहर कर देंगे।”
टीएमसी की शहीद दिवस रैली में ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी ने भाषा, अस्मिता और डिटेंशन कैंप जैसे मुद्दों को आधार बनाकर बीजेपी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ममता ने साफ संदेश दिया है कि 2026 का चुनाव बंगाली पहचान बनाम बाहरी राजनीति की लड़ाई होगी, और टीएमसी इसे दिल्ली तक ले जाने को तैयार है।
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