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Operation Sindoor: ‘भारत ने ठुकराया था अमेरिका की मध्यस्थता का प्रस्ताव’, पाकिस्तान के कबूलनामे से खुली ट्रंप की पोल

September 16, 2025

Operation Sindoor: ‘भारत ने ठुकराया था अमेरिका की मध्यस्थता का प्रस्ताव’, पाकिस्तान के कबूलनामे से खुली ट्रंप की पोल

इंटरनेशनल डेस्क: पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है, जिससे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई मध्यस्थता की दावों की सच्चाई सामने आ रही है। डार ने स्वीकार किया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अमेरिका ने युद्धविराम के लिए एक प्रस्ताव भेजा था, लेकिन भारत ने इस पर सहमति नहीं दी थी।

इशाक डार ने एक कार्यक्रम में बताया कि पाकिस्तान ने अमेरिका के माध्यम से ट्रंप के मध्यस्थता प्रस्ताव पर चर्चा की थी, लेकिन भारत ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से ट्रंप के मध्यस्थता के बारे में पूछा था, तो रुबियो ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख हमेशा से यह रहा है कि यह द्विपक्षीय (bilateral) मामला है, जिसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका नहीं होनी चाहिए।

क्या था मध्यस्थता का प्रस्ताव?

इशाक डार ने कहा कि जब पाकिस्तान ने 10 मई को अमेरिकी विदेश मंत्री से बात की थी, तो रुबियो ने भरोसा दिलाया था कि बहुत जल्द भारत और पाकिस्तान के बीच वार्ता होगी। हालांकि, 25 जुलाई को वाशिंगटन में रुबियो से मिलने पर उन्होंने कहा कि भारत ने इस प्रस्ताव को नकारते हुए इसे केवल द्विपक्षीय मामला मानते हुए तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से इनकार कर दिया।

पाकिस्तान का रुख

इशाक डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को कभी भी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता से कोई आपत्ति नहीं रही। उनका कहना था कि अगर भारत बातचीत करना चाहे, तो पाकिस्तान इसका स्वागत करता है, लेकिन भारत का रुख हमेशा से यही रहा है कि यह मुद्दा केवल दोनों देशों के बीच ही हल होना चाहिए। डार ने यह भी कहा कि पाकिस्तान के लिए द्विपक्षीय बातचीत में कोई समस्या नहीं है, बशर्ते इसमें सभी प्रमुख मुद्दों जैसे आतंकवाद, व्यापार, कश्मीर और अन्य मामलों पर विस्तृत चर्चा हो।

भारत की चुप्पी और पाकिस्तान की बेचैनी

पाकिस्तान ने भारत से बार-बार बातचीत की पहल की है, लेकिन भारत की चुप्पी और पाकिस्तान की बेचैनी दोनों पक्षों के बीच तनाव को बढ़ाने का कारण बन रही है। डार ने कहा कि पाकिस्तान किसी से भी बातचीत की भीख नहीं मांग रहा, लेकिन जब तक भारत बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक कोई समाधान नहीं निकल सकता।

ट्रंप का संघर्ष विराम दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बार कहा था कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम कराने में मदद की है। 10 मई के बाद से ट्रंप 30 से ज्यादा बार दावा कर चुके हैं कि उन्होंने दोनों देशों को संघर्ष विराम के लिए राजी किया था। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका ने दोनों देशों से कहा था कि यदि वे संघर्ष रोकते हैं तो अमेरिका उनके साथ व्यापार बढ़ाएगा। हालांकि, भारत हमेशा से यह कहता रहा है कि संघर्ष विराम पर सहमति भारतीय और पाकिस्तानी सैन्य अधिकारियों (डीजीएमओ) के बीच सीधी बातचीत से बनी थी, न कि किसी तीसरे पक्ष की मदद से।

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