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दिल्ली में कृत्रिम बारिश की तैयारी पूरी, सिरसा ने बताई उन जगहों की लिस्ट जहां बरसेंगे बादल

नेशनल डेस्क: दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए मंगलवार को क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम बारिश कराने की प्रक्रिया) की गई। इस अभियान की जानकारी मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और पर्यावरण मंत्री सिरसा ने दी। क्लाउड सीडिंग का यह काम आईआईटी कानपुर की टीम ने किया। इसके लिए एक सेसना विमान का इस्तेमाल हुआ, जिसमें नमक और सिल्वर आयोडाइड से बने फ्लेयर्स (धुएं जैसी सामग्री छोड़ने वाले यंत्र) लगाए गए थे। विमान मेरठ की दिशा से दिल्ली में दाखिल हुआ।

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प्रक्रिया करीब आधे घंटे तक चली: सिरसा

मौसम की खराब दृश्यता की वजह से यह प्रयोग दोपहर 12:30 बजे के बजाय थोड़ी देरी से शुरू हुआ। इस दौरान खेकड़ा, बुराड़ी, उत्तरी करोल बाग और मयूर विहार के इलाकों में क्लाउड सीडिंग की गई। कुल 8 फ्लेयर्स का इस्तेमाल हुआ, जिनमें से हर एक का वजन 2 से 2.5 किलो था। सिरसा ने बताया कि यह प्रक्रिया करीब आधे घंटे तक चली। हर फ्लेयर 2 से 2.5 मिनट तक चला और बादलों में सामग्री छोड़ी। उस वक्त बादलों में करीब 15 से 20 प्रतिशत नमी थी। परीक्षण के बाद विमान मेरठ में उतर गया।

15 मिनट से लेकर 4 घंटे के अंदर बारिश होने की संभावना

आईआईटी कानपुर और दिल्ली सरकार के मुताबिक, इस प्रयोग से 15 मिनट से लेकर 4 घंटे के अंदर बारिश होने की संभावना है। अगर यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले दिनों में फरवरी तक ऐसे और परीक्षण करने की योजना है। मौसम अनुकूल रहने पर रोज 9 से 10 उड़ानें भी की जा सकती हैं। क्लाउड सीडिंग में बादलों के अंदर सिल्वर आयोडाइड या नमक जैसे कणों को डाला जाता है, जिससे बादल की छोटी बूंदें आपस में मिलकर बड़ी बारिश की बूंदों में बदल जाती हैं। इससे कृत्रिम वर्षा हो सकती है, जो प्रदूषण कम करने में मदद करती है।

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दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स

इस बीच, दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) मंगलवार दोपहर 1 बजे तक 304 रहा, जो “बेहद खराब” श्रेणी में आता है। विभिन्न इलाकों में भी एक्यूआई खतरनाक स्तर पर दर्ज हुआ… आनंद विहार (311), आरके पुरम (316), सिरी फोर्ट (347), बवाना (334), बुराड़ी क्रॉसिंग (319), द्वारका सेक्टर 8 (311), मुंडका (318), नरेला (302) और पंजाबी बाग (313)। सरकार को उम्मीद है कि क्लाउड सीडिंग से हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण नीचे बैठेंगे और लोगों को प्रदूषण से राहत मिलेगी।

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