Last Updated: October 3, 2026

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बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा अपलोड करने के बारे में बातचीत को तैयार: चुनाव आयोग ने SC से कहा

March 18, 2025

बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा अपलोड करने के बारे में बातचीत को तैयार: चुनाव आयोग ने SC से कहा

नेशनल डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग की उस दलील पर गौर किया जिसमें आयोग ने कहा कि वह अपनी वेबसाइट पर बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा अपलोड करने की मांग पर विचार-विमर्श के लिए तैयार है। न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं से 10 दिन में निर्वाचन आयोग के समक्ष प्रतिवेदन देने को कहा।

प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के.वी. विश्वनाथन की पीठ तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और 2019 में गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ द्वारा दायर दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। जनहित याचिकाओं में निर्वाचन आयोग को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में मतदान समाप्त होने के 48 घंटे के भीतर बूथवार मत प्रतिशत आंकड़ा आयोग की वेबसाइट पर अपलोड करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

प्रतिवेदन 10 दिन में पेश किया जाए
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंद्र सिंह ने कहा कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार याचिकाकर्ताओं से मिलकर शिकायत पर चर्चा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘अब यहां नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त हैं। याचिकाकर्ता उनसे मिल सकते हैं और इस पर विचार किया जा सकता है।’’ प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘निर्वाचन आयोग के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता (एनजीओ और सांसद) आयोग के समक्ष अपना प्रतिवेदन दे सकते हैं और आयोग उनकी सुनवाई करेगा तथा इस बारे में पहले से सूचित करेगा। प्रतिवेदन 10 दिन में पेश किया जाए।’’

लोगों की संख्या में भारी विसंगतियां: वकील प्रशांत भूषण
सुनवाई के दौरान एनजीओ की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि ईवीएम की गिनती और मतदान केंद्रों पर वोट डालने आने वाले लोगों की संख्या में भारी विसंगतियां हैं। मोइत्रा की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा, “आखिर कैसे 10 की संख्या अगली सुबह 50 हो गई, इसका स्पष्टीकरण होना चाहिए। प्रकाशित अंतिम सूची और मतदान केंद्र पर जाने वालों में विसंगति है।”

28 जुलाई तक सुनवाई स्थगित
अदालत ने सुनवाई 28 जुलाई के हफ्ते के लिए स्थगित कर दी। पिछले साल 17 मई को शीर्ष अदालत ने निर्वाचन आयोग से इन याचिकाओं पर जवाब मांगा था, जिसके बाद आयोग ने एनजीओ की मांग का विरोध करते हुए कहा था कि इससे चुनावी माहौल खराब होगा।

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