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‘…तो हम 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं’, राजनाथ सिंह ने गिनाए आत्मनिर्भरता के 3 लक्ष्य

October 7, 2025

‘…तो हम 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बना सकते हैं’, राजनाथ सिंह ने गिनाए आत्मनिर्भरता के 3 लक्ष्य

नेशनल डेस्क: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को “विकसित भारत” के लक्ष्य को हासिल करने के लिए तीन महत्वपूर्ण उद्देश्यों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता बढ़ानी होगी और रक्षा उपकरणों के निर्यात में भी वैश्विक स्तर पर प्रमुख बनना होगा।

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नई दिल्ली में आयोजित ‘रक्षा नवाचार संवाद’ कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने बताया कि भारत तकनीकी क्षेत्रों में पहले से अग्रणी है, लेकिन देश को और अधिक प्रगति करनी होगी। इसके लिए नई और विशेष तकनीकों पर ध्यान देना जरूरी होगा। राजनाथ सिंह ने कहा, “यदि हम इन तीन महत्वपूर्ण लक्ष्यों को प्राप्त कर लेते हैं, तो हम 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बना सकते हैं। इसके अलावा, हम रक्षा नवाचार के क्षेत्र में दुनिया के सबसे अग्रणी देश बन सकते हैं।”

 

तीन महत्वपूर्ण लक्ष्य:

आत्मनिर्भरता में वृद्धि: भारत को अपनी रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भर बनना होगा, ताकि हमें विदेशों से उपकरणों की खरीद पर निर्भरता कम हो सके। वैश्विक निर्यातक बनना: भारत को रक्षा क्षेत्र में एक प्रमुख निर्यातक बनना होगा, जिससे भारतीय रक्षा उद्योग को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी स्थिति मिल सके। नवीन तकनीकों में प्रगति: देश को नई तकनीकों में अग्रणी बनना होगा, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और क्वांटम तकनीक जैसी अत्याधुनिक तकनीकों में।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि आधुनिक युद्ध पूरी तरह से तकनीकी हो गया है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण दिया, जिसमें ड्रोन और अन्य तकनीकी युद्ध प्रणालियों का उपयोग किया गया था। इस प्रकार के युद्ध में तकनीकी विशेषज्ञता बेहद जरूरी है।

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नई तकनीकें और चुनौतियां:

राजनाथ सिंह ने कहा कि हमें न केवल वर्तमान में मौजूद तकनीकों में महारत हासिल करनी चाहिए, जैसे AI और क्वांटम तकनीक, बल्कि भविष्य में विकसित होने वाली तकनीकों पर भी ध्यान देना चाहिए। भविष्य में युद्ध की तकनीक और भी अधिक विकसित होगी, और भारत को इसके लिए तैयार रहना होगा।

 

आर्थिक प्रगति:

उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए बताया कि 2021-22 में भारत का घरेलू पूंजी अधिग्रहण लगभग 74,000 करोड़ रुपये था, और 2024-25 तक यह बढ़कर 1.2 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा। यह वृद्धि केवल संख्याओं में नहीं, बल्कि सोच और दृष्टिकोण में भी बदलाव का प्रतीक है। इसके अलावा, राजनाथ सिंह ने 1.5 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 24,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात प्राप्त करने के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल आंकड़ों से अधिक है, और इसके पीछे सभी लोगों के कठिन परिश्रम का योगदान है।

राजनाथ सिंह ने कहा, “आप सभी के प्रयासों के कारण हम 1.5 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 24,000 करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करने में सफल हुए हैं। यह महत्वपूर्ण उपलब्धि है।”इस प्रकार, रक्षा मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को आने वाले वर्षों में रक्षा उद्योग में आत्मनिर्भर और एक वैश्विक शक्ति बनने के लिए लगातार प्रयास करते रहना होगा।

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