Last Updated: October 22, 2026

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Big Breaking : वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं पर SC में 15 अप्रैल को सुनवाई

April 8, 2025

Big Breaking : वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं पर SC में 15 अप्रैल को सुनवाई

नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ याचिकाओं पर सुनवाई 15 अप्रैल, 2025 को हो सकती है। अब तक इस कानून के खिलाफ कुल 6 याचिकाएं अदालत में दायर की जा चुकी हैं। इन याचिकाओं में वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाओं का मुद्दा और अदालत में सुनवाई की मांग

आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ 6 से ज्यादा याचिकाएं दायर की गई हैं, जिनमें इस कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है। इन याचिकाओं पर जल्द से जल्द सुनवाई की मांग की गई थी और कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई की सहमति दी है। दरअसल, वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद और अन्य संगठनों की ओर से दायर की गई याचिकाएं महत्वपूर्ण हैं और इन पर प्राथमिकता से सुनवाई होनी चाहिए। उनका कहना था कि इन याचिकाओं को किसी भी कीमत पर जल्द से जल्द सुना जाना चाहिए, क्योंकि ये धार्मिक स्वतंत्रता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ी हुई हैं।

याचिकाओं में कौन-कौन शामिल?

इन छह याचिकाओं में कई प्रमुख नेताओं और संगठनों ने वक्फ बिल की संवैधानिकता को चुनौती दी है। इनमें प्रमुख याचिकाकर्ता शामिल हैं:

  • मौलाना अरशद मदनी (जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष)

 

  • समस्त केरल जमीयतुल उलेमा

 

  • आम आदमी पार्टी के नेता अमानतुल्लाह खान

 

  • कांग्रेस सांसद जावेद मोहम्मद

 

  • AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी

 

  • एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स

 

इन याचिकाओं में वक्फ कानून में किए गए कुछ प्रावधानों को संविधान के अनुच्छेद 26 और धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ माना गया है।

वक्फ कानून के खिलाफ तर्क

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वक्फ कानून में किए गए कुछ बदलाव धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करते हैं। विशेष रूप से, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान और सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण देने की व्यवस्था मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप करती है। इसके अलावा, याचिकाओं में यह भी दावा किया गया है कि यह विधेयक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह केवल मुस्लिम समुदाय की वक्फ संपत्तियों को प्रभावित करता है। अन्य धर्मों के धार्मिक संस्थानों के लिए इस तरह के प्रावधान नहीं बनाए गए हैं, जो इसे भेदभावपूर्ण और असंवैधानिक मानते हैं।

क्या है वक्फ कानून का विवाद?

वक्फ कानून के तहत वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन और नियंत्रण वक्फ बोर्ड के हाथों में होता है। याचिकाओं में दावा किया गया है कि इस कानून के तहत किए गए कुछ बदलाव मुस्लिम समुदाय के धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकारों में हस्तक्षेप कर सकते हैं, क्योंकि यह धार्मिक मामलों में सरकार की अधिक भूमिका को स्थापित करता है। सुप्रीम कोर्ट में वक्फ कानून के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं पर जल्द सुनवाई होने की संभावना है। इस मामले में धार्मिक स्वतंत्रता और संविधान के अनुच्छेद 26 के उल्लंघन को लेकर बहस की जाएगी, जो अल्पसंख्यक समुदायों को धार्मिक मामलों में स्वतंत्रता प्रदान करता है। अब देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट इस मुद्दे पर क्या फैसला सुनाता है।

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