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Tahawwur Rana : हां मैं PAK सेना का भरोसेमंद ऐजेंट था… NIA की पूछताछ में तहव्वुर राणा ने खोला 26/11 का राज

July 7, 2025

Tahawwur Rana : हां मैं PAK सेना का भरोसेमंद ऐजेंट था… NIA की पूछताछ में तहव्वुर राणा ने खोला 26/11 का राज

नेशनल डेस्क : मुंबई में 26/11 को हुए आतंकी हमले के एक प्रमुख आरोपी तहव्वुर राणा ने भारत लाए जाने के बाद एनआईए (NIA) की पूछताछ में कई सनसनीखेज खुलासे किए हैं। खबर है कि राणा ने पूछताछ के दौरान पाकिस्तानी सेना की संलिप्तता का भी नाम लिया है। उसने बताया कि वह पाकिस्तान की सेना में एजेंट था। हालांकि अभी तक इस पर किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। आइए जानते है इस खबर को विस्तार से…

PAK सेना का एजेंट था तहव्वुर राणा ?

आपको बता दें कि एक रिपोर्ट के अनुसार, NIA के सूत्रों ने दावा किया है कि तहव्वुर राणा ने खुद स्वीकार किया है कि वह पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद एजेंट था। उसने कहा कि उसे पाकिस्तान की सेना पर पूरा भरोसा था और वह उनके निर्देशों पर काम करता था। उसने यह भी बताया कि गल्फ युद्ध (खाड़ी युद्ध) के समय उसे पाकिस्तानी सेना द्वारा सऊदी अरब भेजा गया था।

लश्कर-ए-तैयबा के साथ ट्रेनिंग में शामिल रहा

राणा ने माना कि वह अपने पुराने दोस्त और 26/11 के मुख्य साजिशकर्ता डेविड हेडली के साथ पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा द्वारा चलाए गए कई ट्रेनिंग कैंपों में हिस्सा ले चुका है। उसका कहना है कि लश्कर सिर्फ एक आतंकी संगठन नहीं था, बल्कि वह एक मजबूत जासूसी नेटवर्क की तरह भी काम करता था, जिसका मकसद भारत में बड़े हमले की योजना बनाना और जानकारी जुटाना था।

हमले से पहले मुंबई में मौजूद था तहव्वुर राणा

सूत्रों के अनुसार, राणा ने यह भी कबूल किया है कि हमले के दौरान वह खुद मुंबई में मौजूद था। उसने छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) और अन्य संभावित निशानों का जायजा लिया था। वह आतंकवादियों को सही जानकारी देने और हमले की तैयारी में मदद करने का काम कर रहा था। यह जानकारी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि इससे पता चलता है कि राणा सिर्फ योजनाकार ही नहीं, बल्कि मैदान में सक्रिय तौर पर मौजूद भी था।

प्रत्यर्पण के बाद भारत में न्यायिक हिरासत में

पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक तहव्वुर राणा, अमेरिका में सजा काट चुका है। उसे अमेरिका की एक अदालत ने 4 अप्रैल 2025 को भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद भारत लाकर उसे न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अब एनआईए की टीम उससे पूछताछ कर रही है और इसके आधार पर नई गिरफ्तारियां और खुलासे भी हो सकते हैं।

डेविड हेडली का करीबी सहयोगी

राणा, डेविड कोलमैन हेडली (जिसका असली नाम दाऊद गिलानी है) का गहरा दोस्त और सहयोगी रहा है। हेडली पहले ही स्वीकार कर चुका है कि उसने भारत में कई जगहों का दौरा किया और 26/11 हमलों के लिए जमीन तैयार की थी। अब राणा के कबूलनामे से यह स्पष्ट होता जा रहा है कि हमलों की साजिश बहुत गहराई से रची गई थी और उसमें कई अंतरराष्ट्रीय चेहरों की भूमिका रही है।

26/11 की जांच को मिल सकते हैं नए सुराग

तहव्वुर राणा के इस कबूलनामे से भारत की जांच एजेंसियों को हमलों की साजिश, नेटवर्क और पाकिस्तानी सेना की भूमिका पर और पुख्ता जानकारी मिल सकती है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान के खिलाफ और साक्ष्य जुटाने में मदद मिल सकती है। अब देखना यह होगा कि पूछताछ में आगे और क्या खुलासे होते हैं और जांच किस दिशा में जाती है।

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