Last Updated: October 9, 2026

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आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर लड़ना होगा: Shital Vij Chief Editor Dainik Savera

May 8, 2025

आतंक के खिलाफ पूरी दुनिया को एकजुट होकर लड़ना होगा: Shital Vij Chief Editor Dainik Savera

नेशनल डेस्क: कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने जब 22 अप्रैल को धर्म पूछकर बैसरण घाटी को इंसानों के खून से लाल कर दिया तो उसी समय तय हो गया था कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़नी ही होगी। सीमा पार से आतंकवाद ने पहली बार धर्म के आधार पर चुन चुन कर हत्याएँ की महिलाओं के सामने उनके पत्तियों की हत्या कर दी।

मकसद एक ही था कि भारत में धर्म के आधार पर तनाव पैदा कर देना उससे एक हफ्ते पहले ही 16 अप्रैल को पाकिस्तान फौज के मुखिया जनरल असीम मुनीर ने इस्लामाबाद में प्रवासी पाकिस्तानियों के एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान की जीवन रेखा बताया था और दो- राष्ट्र सिद्धांत का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान और भारत अलग- अलग राष्ट्र हैं क्योंकि उनके धर्म, परंपराएँ, विचार और महत्वाकांक्षाएँ अलग-अलग है। फिर पहलगाम हमले के बाद 28 अप्रैल को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने एक समाचार चैनल स्काई न्यूज को दिए इंटरव्यू में स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने तीन दशकों तक आतंकवादी संगठनों को समर्थन और वित्तीय सहायता दी थी जिसे उन्होंने अमरीका के लिए किया गया गंदा काम बताया।

इसके अगले ही दिन 29 अप्रैल को भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान को आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला कपटी देश करार दिया था भारत की संयुक्त राष्ट्र में स्थायी उप प्रतिनिधि योजना पटेल ने आतंकवाद पीड़ित संघ नेटवर्क (वोटान) के उद्घाटन कार्यक्रम में पाकिस्तान के रक्षा मंत्री खाजा के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने दशकों तक आतंकवादी संगठनों को समर्थन, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता दी है।

इस बयान के बाद भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि वह पाकिस्तान की आतंकवाद को बढ़ावा देने वाली नीतियों पर ध्यान दें और इसे वैश्विक आतंकवाद का केंद्र मानें ऐसा मानने की गवाही खुद पाकिस्तान से आ रही है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व विदेश मंत्री विलावल भुट्टो ने भी एक संदर्भ में 2 मई को एक साक्षात्कार के दौरान स्वीकार किया था कि पाकिस्तान का अतीत आतंकवाद से जुड़ा रहा है और यह कोई रहस्य नहीं है।

आतंकवाद पर इस कड़े प्रहार ने भारत के जख्मों पर कुछ मलहम लगाया है। जिन भारतीय महिलाओं की माँग का सिंदूर पुछा था, उनके और उनके परिवारों के दिलों को कुछ सुकून मिला होगा। लेकिन क्या इतने भर से भारत को चैन ले लेना होगा? क्या आगे से भारत या दूसरे मुल्को में आतंकवादी घटनाएँ नहीं होंगी?

आतंकवाद केवल भारत की समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती है दुनिया के कई देशों को आतंकवाद का सामना करना पड़ा है और यह आवश्यक है कि सभी देश मिलकर इस खतरे का मुकाबला करें।

इस संबंध में दुनिया को पाक रक्षामंत्री खाजा के बयान का गहराई से विश्लेषण करना होगा। हो सकता है कि पहलगाम हमले के बाद दुनिया की सहानुभूति जुटाने के लिए एक खास समय पर यह बयान दिया हो कि पाकिस्तान का आतंकवाद को समर्थन अमरीका के लिए किया गया गंदा काम था यह तय था कि भारत कार्रवाई करेगा। हो सकता है कि दुनिया से अलग-थलग होने से बचने के लिए भी यह स्वीकारोक्ति को गई हो दुनियाभर के देशों को समझना होगा कि पाकिस्तान यह कहकर बच नहीं सकता है। वह अपने जन्मकाल से ही एक दुष्ट देश रहा है।

दो दशक से ज्यादा समय तक पाकिस्तान ने पंजाब और कश्मीर में आतंकवाद को पाला पोसा, लेकिन पश्चिमी दुनिया के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। उसे तब होश आया, जब 9/11 को अमरीका पर आतंकी हमला हुआ और ट्विन टावर ध्वस्त हो गए, अमरीकी रक्षा मुख्यालय पेंटागन पर भी हमला हुआ।

इसका मास्टर माइंड सऊदी ओसामा बिन लादेन एक दशक तक अमरीका को छकाते हुए आखिरकार मारा भी गया तो पाकिस्तान के एबटाबाद में ठीक उसकी मिलिट्री एकेडमी के बगल की कोठी में अमरीका ने तब शायद यह मान लिया था कि उसने आतंकवाद के खिलाफ अपनी लड़ाई पूरी कर दी है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं है यह समझना होगा कि दुनिया के किसी भी एक कोने में चल रहा आतंकवाद आज नहीं तो कल दूसरे कोने को भी प्रभावित करेगा ही। ऐसे में वक्त आ गया है कि दुनिया आतंकवाद को एक महामारी मानकर इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़े जैसा कि भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने पाकिस्तान को वैश्विक आतंकवाद का गढ़ बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इसके खिलाफ कड़ा रुख अपनाने की मांग की भी है।

अब वक्त आ गया है कि संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों को आतंकवाद के खिलाफ टोस नीति बनानी चाहिए तुर्की, चीन जैसे कई देश आतंकवाद में भेद करते हैं। संयुक्त राष्ट्र आतंकवाद की परिभाषा तय करे और पूरी दुनिया इस पर सहमत हो। आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देशों पर कड़े प्रतिबंध लगाए जाने चाहिए और आतंकवादियों को पनाह देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। तभी एक शांतिपूर्ण, खुशहाल और मानवीय दुनिया का सपना साकार हो सकता है।

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