Last Updated: September 20, 2026

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यूपी में पहली बार ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर सजा, डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले को 7 साल की जेल

July 18, 2025

यूपी में पहली बार ‘डिजिटल अरेस्ट’ पर सजा, डॉक्टर से 85 लाख ठगने वाले को 7 साल की जेल

नेशनल डेस्क: उत्तर प्रदेश में पहली बार डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराध के मामले में कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई है। यह मामला राजधानी लखनऊ का है, जहाँ एक साइबर ठग ने खुद को CBI अधिकारी बताकर वरिष्ठ महिला डॉक्टर से 85 लाख रुपये ठग लिए। कोर्ट ने इस मामले में आरोपी को 7 साल की जेल और जुर्माना भी लगाया है।

क्या है पूरा मामला?

लखनऊ के KGMU (किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी) में काम करने वाली डॉक्टर डॉ. सौम्या गुप्ता से 15 अप्रैल 2024 को एक कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को कस्टम अधिकारी बताया और कहा कि वह दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट से बोल रहा है। उसने डॉक्टर को बताया कि उनके नाम से एक कार्गो बुक है, जिसमें फर्जी पासपोर्ट, एटीएम कार्ड और 140 ग्राम नशीला पदार्थ (एमडीएम) मिला है। इसके बाद कॉल किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर दिया गया जिसने खुद को CBI अधिकारी बताया। उस व्यक्ति ने डॉक्टर को डराया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें 7 साल की जेल हो सकती है।

कैसे हुआ ठगी का खेल?

डॉक्टर डर गईं और उन्होंने अपनी पर्सनल जानकारी जैसे बैंक खाता नंबर, पैन कार्ड नंबर, और जायदाद की डिटेल्स साझा कर दीं। इसके बाद आरोपी ने उन्हें 10 दिनों तक मानसिक रूप से धमकाकर ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखा, यानी ऐसा माहौल बना दिया कि वह बाहर किसी से बात न करें और पुलिस से भी न जुड़ें। इस दौरान डॉक्टर से अलग-अलग 4 बैंक खातों में कुल ₹85 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए।

जांच और सजा

इस मामले की जांच लखनऊ साइबर क्राइम थाना ने की। जांच अधिकारी इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव ने कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए। अंत में कोर्ट ने आरोपी देवाशीष को दोषी पाया और स्पेशल CJM (कस्टम) अमित कुमार ने उसे 7 साल की सजा और जुर्माना सुनाया। देवाशीष, उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अजमतगढ़ के मसौना गांव का रहने वाला है।

यह मामला क्यों है खास?

यह भारत का पहला मामला है जिसमें ‘डिजिटल अरेस्ट’ के आरोप में किसी को सिर्फ 14 महीने के भीतर सजा सुनाई गई है। यह फैसला साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच एक कड़ा संदेश भी है कि इस तरह के अपराध अब बख्शे नहीं जाएंगे।

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