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अमेरिका के ‘गोल्डन डोम’ मिसाइल रक्षा प्रणाली में शामिल होने पर विचार कर रहा है कनाडा: PM Mark Carney

टोरंटो: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने बुधवार को घोषणा की कि उनकी सरकार अमेरिका के आगामी ‘गोल्डन डोम मिसाइल रक्षा प्रणाली में शामिल होने पर विचार कर रही है। इस मामले में अमेरिका के साथ बातचीत चल रही है, और कनाडा के सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रणाली का हिस्सा बनने पर चर्चा की जा रही है।

यह घोषणा उस समय हुई जब कार्नी ने कहा कि अमेरिका की यह प्रणाली, जिसकी लागत 175 अरब अमेरिकी डॉलर है, कनाडा के लिए एक सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने में मदद कर सकती है। विशेष रूप से, यह प्रणाली पहली बार अमेरिकी हथियारों को अंतरिक्ष तक पहुंचाने का कार्य करेगी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि 2029 तक इस प्रणाली को पूरी तरह से लागू किया जाएगा।

-‘गोल्डन डोम’ प्रणाली का उद्देश्य:

1.प्रक्षेपण से पहले मिसाइल का पता लगाना और उन्हें नष्ट करना: इस चरण में, प्रणाली के द्वारा मिसाइलों की पहचान की जाएगी और उन्हें नष्ट करने के लिए त्वरित कदम उठाए जाएंगे।

2.मिसाइल को उड़ान के शुरुआती चरण में रोकना: इस चरण में मिसाइलों को उनके मार्ग में ही रोका जाएगा ताकि उनका प्रभावी हमला न हो सके।

3.हवा में मिसाइल को बीच में ही नष्ट करना: उड़ान के मध्य में ही मिसाइलों को रोकने की योजना है, जिससे वे अपने लक्ष्यों तक पहुंचने से पहले ही निष्क्रिय हो जाएं।

4.अंतिम मिनटों में मिसाइल को नष्ट करना: इस चरण में, जब मिसाइल अपने लक्ष्य के पास होगी, तो उसे रोकने के लिए अंतिम समय में प्रणाली सक्रिय होगी।

-कनाडा की सुरक्षा के लिहाज से अहम:

प्रधानमंत्री कार्नी ने इस रक्षा प्रणाली के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह कदम कनाडा की सुरक्षा को और सुदृढ़ करेगा, खासकर जब देश को “निकट भविष्य” में संभावित मिसाइल खतरों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस समय कनाडा के साथ उच्च स्तर पर चर्चा की जा रही है और यह निर्णय कनाडा के राष्ट्रीय हितों के अनुकूल लिया जाएगा।

कार्नी ने यह भी पुष्टि की कि कनाडा की सरकार ने अमेरिकी प्रशासन से संपर्क किया है, और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि वे ओटावा के साथ सहयोग करने के लिए तैयार हैं, ताकि कनाडा इस रक्षा प्रणाली में उचित योगदान दे सके।

-कनाडा का ‘गोल्डन डोम’ में भागीदारी पर विचार:

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि कनाडा का इस कार्यक्रम में भाग लेना “सुरक्षा की दृष्टि से एक अच्छा विचार” हो सकता है। यह कदम कनाडाई लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया जा सकता है, और इसे लेकर दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संवाद चल रहा है।

हालांकि, कार्नी ने यह चेतावनी भी दी कि कनाडा को भविष्य में मिसाइल हमलों के खतरों से निपटने के लिए अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने की आवश्यकता हो सकती है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय जल्दी लिया जाएगा, क्योंकि समय की मांग है कि देश अपनी सुरक्षा योजनाओं को तत्काल अपडेट करे।

-अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया अध्याय:

यदि कनाडा इस रक्षा प्रणाली का हिस्सा बनता है, तो यह एक बड़ा कदम होगा, जो न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि पूरे उत्तरी अमेरिका के सुरक्षा परिदृश्य को भी प्रभावित करेगा। अमेरिका और कनाडा का यह सहयोग दोनों देशों के रक्षा हितों को साझा करेगा और संभावित खतरों के खिलाफ एक मजबूत दीवार खड़ी करेगा।

इस नई प्रणाली से कनाडा को अपनी रक्षा रणनीतियों को वैश्विक मानकों पर लाने का अवसर मिलेगा, साथ ही साथ यह एक प्रभावी सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। अब देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर कनाडा और अमेरिका के बीच क्या निर्णायक चर्चा होती है और कनाडा इस प्रणाली में अपनी भूमिका निभाने के लिए कब आगे बढ़ता है।

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