हिमाचल डेस्कः प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) और प्रदेश के कॉलेजों की फीस में 12 वर्षों बाद बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले वर्ष 2014 में फीस संशोधित की गई थी। शनिवार को कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कार्यकारी परिषद की बैठक में 10 से 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने को मंजूरी दी गई। हालांकि विश्वविद्यालय की वित्त समिति ने फीस को तीन गुना तक बढ़ाने या 2014 की रिसोर्स मोबिलाइजेशन कमेटी की सिफारिशों के आधार पर हर वर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रस्ताव रखा था। यदि यह प्रस्ताव लागू होता, तो विश्वविद्यालय में शिक्षा काफी महंगी हो सकती थी।
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क्यों लिया गया फैसला
बैठक में न्यूनतम 10 प्रतिशत और अधिकतम 40 प्रतिशत तक फीस बढ़ाने पर सहमति बनी। यह ध्यान रखा गया कि जिन मदों में छात्रों की भागीदारी अधिक होती है, वहां कम वृद्धि की जाए, जबकि अन्य मदों में अपेक्षाकृत अधिक बढ़ोतरी की गई। वित्तीय तंगी और वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य सरकार से मिलने वाले बजट में संभावित कटौती को देखते हुए यह निर्णय लिया गया।
परीक्षा शुल्क में बढ़ोतरी
करीब दो घंटे चली चर्चा के बाद अगले शैक्षणिक सत्र से नई फीस संरचना लागू करने पर सहमति बनी। सूत्रों के अनुसार, विश्वविद्यालय में 10 प्रतिशत और कॉलेजों में 40 प्रतिशत तक फीस वृद्धि को मंजूरी दी गई है। स्नातक कक्षाओं के परीक्षा फॉर्म शुल्क को 800 रुपये से बढ़ाकर 1200 रुपये कर दिया गया है।
पड़ोसी राज्यों से तुलना
कुलपति प्रोफेसर महावीर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसलिए सीमित वृद्धि ही की जाए। कार्यकारी परिषद ने अन्य राज्यों के विश्वविद्यालयों की फीस संरचना का अध्ययन किया और पाया कि वहां फीस एचपीयू की तुलना में काफी अधिक है।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णय
बैठक में उपस्थित सदस्य
बैठक में प्रो-वाइस चांसलर प्रोफेसर राजेंद्र वर्मा, शिमला शहरी के विधायक हरीश जनार्था, पूर्व आचार्य मोहन झारटा, निदेशक उच्चतर शिक्षा डॉ. अमरजीत सिंह, आईजीएमसी की प्रधानाचार्य डॉ. सीता ठाकुर, कुलसचिव ज्ञान सागर नेगी, परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर श्याम लाल कौशल सहित कई अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
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