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Vice Presidential Election: विपक्ष ने सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार चुना, सीपी राधाकृष्णन से होगा मुकाबला

August 19, 2025

Vice Presidential Election: विपक्ष ने सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार चुना, सीपी राधाकृष्णन से होगा मुकाबला

नई दिल्ली: इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को आगामी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी को अपना उम्मीदवार घोषित किया। चुनाव 9 सितंबर को होंगे, और यह भारत के सबसे प्रतिष्ठित न्यायविदों में से एक, बी सुदर्शन रेड्डी और एनडीए के उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन के बीच मुकाबला होगा।

खड़गे ने की नाम की घोषणा

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दिल्ली में इंडिया ब्लॉक की बैठक के बाद यह घोषणा की। उन्होंने बताया कि बी सुदर्शन रेड्डी 21 अगस्त को अपना नामांकन दाखिल करेंगे। खड़गे ने कहा, “यह उपराष्ट्रपति चुनाव एक वैचारिक लड़ाई है, और सभी विपक्षी दल इस पर सहमत हैं।” उन्होंने न्यायमूर्ति रेड्डी की तारीफ करते हुए उन्हें “देश के सबसे प्रगतिशील न्यायविदों में से एक” बताया। न्यायमूर्ति रेड्डी का कानूनी करियर बेहद प्रतिष्ठित रहा है, जिसमें आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय, गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और भारत के सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में कार्य किया है।

 

कौन हैं सुदर्शन रेड्डी

न्यायमूर्ति बी सुदर्शन रेड्डी का जन्म 8 जुलाई 1946 को हुआ था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में की और बाद में उन्हें गुवाहाटी उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश तथा सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया। उन्होंने हमेशा गरीबों और आम आदमी के अधिकारों की रक्षा के लिए कई ऐतिहासिक फैसले दिए।

उपराष्ट्रपति चुनाव की तारीखें

चुनाव आयोग ने पहले ही उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए 9 सितंबर की तारीख तय की है। नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है, और उम्मीदवार 25 अगस्त तक अपना नामांकन वापस ले सकते हैं।

जगदीप धनखड़ का इस्तीफा

इस चुनाव की वजह से उपराष्ट्रपति का पद खाली हुआ, जब जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। अब यह चुनाव संसद के दोनों सदनों के सांसदों द्वारा निर्वाचक मंडल प्रणाली के तहत कराया जाएगा, जिसमें आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली का पालन किया जाएगा।

चुनाव का महत्व

यह उपराष्ट्रपति चुनाव सिर्फ एक पद भरने के लिए नहीं, बल्कि एक वैचारिक लड़ाई के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दल अपने उम्मीदवार को प्रमुखता देने के लिए एकजुट हुए हैं।

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