नेशनल डेस्क : लोकसभा में वक्फ संशोधन बिल पेश होने जा रहा है, जो अगले दिन यानी कल दोपहर 12 बजे सदन में प्रस्तुत किया जाएगा। इस बिल पर 8 घंटे की चर्चा होने की संभावना है, हालांकि विपक्ष ने 12 घंटे की चर्चा की मांग की थी, लेकिन ऐसा न होने पर विपक्ष ने वॉकआउट करने का ऐलान किया है। यह बिल एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है और इसके पारित होने को लेकर राजनीति में भारी चर्चाएं हो रही हैं।
लोकसभा में संख्या बल…
लोकसभा में कुल 542 सांसद हैं, जिनमें से 240 बीजेपी के सदस्य हैं और एनडीए के पास 293 सांसद हैं। बिल को पास करने के लिए 272 सांसदों का समर्थन जरूरी है, जिससे सरकार को पर्याप्त संख्या मिल रही है। विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के पास 99 सांसद हैं और विपक्षी गठबंधन का कुल समर्थन 233 सांसदों का है। इसके अलावा, शिरोमणि अकाली दल और आजाद पार्टी के पास एक-एक सांसद हैं, जबकि कुछ निर्दलीय सांसद भी हैं जिनका रुख अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है।
राज्यसभा में स्थिति
राज्यसभा में कुल 236 सदस्य हैं, जिनमें बीजेपी के पास 98 सांसद हैं और एनडीए गठबंधन के पास 115 सांसद हैं। इसके अलावा, 6 मनोनीत सांसद हैं, जो आमतौर पर सरकार के साथ रहते हैं, जिससे एनडीए की कुल संख्या 121 हो जाती है। राज्यसभा में बिल पास करने के लिए 119 सांसदों का समर्थन जरूरी है।
JDU और TDP पर सबकी निगाहें
वक्फ संशोधन बिल को लेकर सबसे ज्यादा ध्यान मोदी सरकार के सबसे मजबूत सहयोगी दल जेडीयू (जनता दल यूनाइटेड) और टीडीपी (तेलुगु देशम पार्टी) पर है। दोनों ही दलों ने अब तक इस बिल पर अपना रुख साफ नहीं किया है, और उनकी स्थिति पर सभी की निगाहें हैं। इन दोनों दलों के समर्थन से सरकार को बहुमत मिल सकता है, या फिर विपक्ष को मजबूत भी मिल सकता है।
बिल का उद्देश्य और राजनीतिक संदर्भ
वक्फ संशोधन बिल में कुछ महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव किया गया है, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। इसके अलावा, बिल में यह भी प्रस्तावित किया गया है कि वक्फ बोर्डों को अधिक शक्तियां और अधिकार दिए जाएं, ताकि वे अपने कार्यों में अधिक सुधार कर सकें। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि इस बिल का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय के धार्मिक संस्थानों के नियंत्रण को बढ़ाना है, जो एक राजनीतिक विवाद को जन्म दे सकता है।
वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में लंबी चर्चा होगी, और विपक्ष की वॉकआउट की धमकी से यह बिल और भी ज्यादा चर्चा का विषय बन गया है। अब देखना यह होगा कि जेडीयू और टीडीपी जैसे दल इस बिल पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या सरकार इस बिल को बिना किसी बाधा के पारित करा पाती है या नहीं।