Last Updated: October 12, 2026

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दिल्ली में पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना लागू! जानें कौन कर सकता है आवेदन और कितनी मिलेगी राशि

December 30, 2024

दिल्ली में पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना लागू! जानें कौन कर सकता है आवेदन और कितनी मिलेगी राशि

नई दिल्ली : पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आम आदमी पार्टी द्वारा शुरू की गई एक महत्वपूर्ण पहल है। इस योजना का उद्देश्य दिल्ली के मंदिरों और गुरुद्वारों में काम करने वाले पुजारियों और ग्रंथियों को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। इसके तहत इन धार्मिक सेवक वर्ग के लोगों को सम्मान राशि के रूप में हर महीने 18,000 रुपये दिए जाएंगे। आइए, इस योजना के विभिन्न पहलुओं को विस्तार से जानते हैं…

क्या है इस योजना का उद्देश्य

पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना का प्रमुख उद्देश्य दिल्ली के मंदिरों और गुरुद्वारों में काम करने वाले पुजारियों और ग्रंथियों के योगदान को सम्मानित करना है। यह योजना उन लोगों को आर्थिक सहायता देने के लिए बनाई गई है जो समाज में धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके माध्यम से आम आदमी पार्टी का लक्ष्य पुजारियों और ग्रंथियों के जीवन स्तर में सुधार लाना है और उनके सम्मान को बढ़ाना है। इससे यह भी संदेश मिलता है कि सरकार धार्मिक कार्यों में लगे लोगों की सामाजिक और सांस्कृतिक धरोहर को बनाए रखने के प्रयासों को मान्यता देती है।

आवेदन की पात्रता

यह योजना विशेष रूप से दिल्ली के मंदिरों और गुरुद्वारों में कार्यरत पुजारियों और ग्रंथियों के लिए है। इस योजना के तहत आवेदन करने के लिए कुछ खास शर्तें हैं:

  • पुजारियों और ग्रंथियों का दिल्ली के मंदिरों और गुरुद्वारों में कार्यरत होना जरूरी है।
  • इस योजना का लाभ चर्च या मस्जिद में काम करने वाले धार्मिक व्यक्तियों को नहीं मिलेगा, क्योंकि इस योजना में सिर्फ मंदिर और गुरुद्वारे के धार्मिक कर्मकांडी शामिल हैं।

योजना के तहत मिलने वाली राशि

इस योजना के तहत योग्य पुजारियों और ग्रंथियों को हर महीने 18,000 रुपये की सम्मान राशि दी जाएगी। हालांकि, यह राशि 2025 में दिल्ली विधानसभा चुनाव के परिणामों के आधार पर दी जाएगी। इसका मतलब यह है कि अगर आम आदमी पार्टी चुनाव जीतती है, तो योजना का लाभ तभी मिलेगा। इस राशि को पुजारियों और ग्रंथियों के कठिन कार्य और उनके समाज में योगदान के लिए एक सम्मान के रूप में देखा जा रहा है।

कब से शुरू होगा आवेदन?

इस योजना के तहत आवेदन 31 दिसंबर 2024 से शुरू होंगे। अरविंद केजरीवाल ने यह घोषणा की थी कि वह खुद राजीव चौक स्थित प्राचीन हनुमान मंदिर में पुजारियों का रजिस्ट्रेशन करेंगे और इसके बाद पूरे दिल्ली में रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया शुरू करेंगे।

क्या हैं आवेदन प्रक्रिया …

अभी तक इस योजना की पात्रता के लिए कोई आधिकारिक सरकारी नोटिफिकेशन जारी नहीं किया गया है, लेकिन केजरीवाल का कहना है कि योग्य पुजारियों और ग्रंथियों को 18,000 रुपये की सम्मान राशि मिलेगी। आवेदन प्रक्रिया डिजिटल और ऑफलाइन दोनों रूपों में हो सकती है। पुजारियों और ग्रंथियों को रजिस्ट्रेशन के दौरान अपनी पहचान और कार्य स्थान से संबंधित दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।

योजना का प्रभाव

  • पुजारियों और ग्रंथियों के जीवन स्तर में सुधार
  • इस योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता पुजारियों और ग्रंथियों के जीवन में सुधार ला सकती है। यह योजना उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो धार्मिक कार्यों में लगे रहते हैं, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति अक्सर खराब रहती है।
  • धार्मिक सेवाओं में योगदान

    इस योजना से समाज में धार्मिक सेवाओं का योगदान भी बढ़ेगा क्योंकि पुजारी और ग्रंथी अब अपने काम को और अधिक समर्पण के साथ कर सकेंगे, उनके पास आर्थिक सुरक्षा होगी।

केजरीवाल का बयान

आपको बता दें कि अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर इस योजना का उल्लेख करते हुए लिखा, “आम आदमी पार्टी के जीतने पर दिल्ली में मंदिरों के पुजारियों और गुरुद्वारा साहिब के ग्रंथियों को ₹18,000 प्रति माह की सम्मान राशि दी जाएगी। यह योजना समाज में उनके आध्यात्मिक योगदान और हमारी सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित रखने के उनके प्रयासों का सम्मान है।”

योजना का राजनीतिक संदर्भ

यह योजना दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एक चुनावी पहल के रूप में देखी जा रही है। अरविंद केजरीवाल ने यह सुनिश्चित किया है कि इस योजना से उनके पार्टी के समर्थक, खासकर धार्मिक समुदाय के लोग, प्रभावित होंगे। हालांकि, योजना के क्रियान्वयन के लिए अभी इंतजार करना होगा, क्योंकि यह राशि केवल तब मिलेगी जब आम आदमी पार्टी चुनाव जीतकर सरकार बनाती है।

पुजारी-ग्रंथी सम्मान योजना दिल्ली में काम करने वाले पुजारियों और ग्रंथियों के लिए एक नई पहल है, जिसका उद्देश्य उन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करना और उनके योगदान को सम्मानित करना है। हालांकि, इस योजना का वास्तविक लाभ 2025 में चुनाव परिणामों के बाद ही मिलेगा। इस योजना से पुजारियों और ग्रंथियों की स्थिति में सुधार आ सकता है, और वे समाज में अपने धार्मिक कार्यों को और बेहतर तरीके से अंजाम दे पाएंगे।

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