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बैंकिंग कंपनियां अब 50,000 रुपए से अधिक ब्याज आय पर TDS काटेंगी

नई दिल्ली : बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के प्रावधानों के तहत आने वाली सभी ‘बैंकिंग कंपनियां’ निर्धारित सीमा से अधिक ब्याज आय पर स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) करेंगी। आयकर विभाग ने सोमवार को यह जानकारी दी। आयकर कानून के अनुसार, यदि बैंक या डाकघर जमा से प्राप्त ब्याज आय एक वित्त वर्ष में सामान्य नागरिकों के लिए 50,000 रुपए और वरिष्ठ नागरिकों के लिए 1 लाख रुपए से अधिक हो जाती है, तो उस पर टीडीएस काटा जाता है।

आयकर विभाग ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी दी कि नए आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 402 के तहत ‘बैंकिंग कंपनी’ से तात्पर्य उन कंपनियों से है जिन पर बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 लागू होता है। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत ‘बैंकिंग कंपनी’ की परिभाषा में केवल वे कंपनियां ही नहीं, बल्कि उस अधिनियम की धारा 51 में उल्लेखित ‘कोई भी बैंक या बैंकिंग संस्था’ भी शामिल हैं।

विभाग ने स्पष्ट किया कि बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 की वर्तमान धारा 51 के तहत आने वाले ऐसे बैंक एवं बैंकिंग संस्थान, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 402 के अंतर्गत ‘बैंकिंग कंपनी’ की परिभाषा में शामिल माने जाएंगे, भले ही उनका स्पष्ट उल्लेख न हो। आयकर विभाग ने कहा, इस प्रकार ऐसे बैंक या बैंकिंग संस्थान धारा 393(1) में निर्धारित सीमा से कम राशि पर आयकर काटने के लिए बाध्य नहीं होंगे।’

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