मुंबई: भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इरादतन चूककत्र्ताओं और बड़े चूककत्र्ताओं से निपटने पर एक निर्देश जारी किया है। इसके तहत बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को 25 लाख रुपए और उससे अधिक की बकाया राशि वाले सभी गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) खातों में ‘इरादतन चूक’ की जांच करनी होगी। बैंक एक विशेष प्रक्रिया का पालन करके किसी व्यक्ति की पहचान करेंगे और उसे ‘इरादतन चूककत्र्ता’ के रूप में वर्गीकृत करेंगे। निर्देश के अनुसार, इरादतन चूक के सबूतों की जांच एक पहचान समिति करेगी। ‘इरादतन चूककत्र्ता’ का अर्थ है एक ऐसा कजर्दार या गारंटर जिसने जानबूझकर कर्ज नहीं चुकाया है और उसकी बकाया राशि 25 लाख रुपए से अधिक है। आरबीआई ने कहा, ‘बैंक 25 लाख रुपए और उससे अधिक की बकाया राशि वाले सभी एनपीए खातों में ‘इरादतन चूक’ की समय-समय पर जांच करेंगे।’
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