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दिवाली से पहले केंद्र का सरकारी कर्मचारियों को बड़ा तोहफा, DA में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान 

Centre has announced a 3% increase in DA for government employees

Centre has announced a 3% increase in DA for government employees

मुंबई: केंद्र सरकार ने बुधवार को केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों और पेशभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया है। इसका फायदा 1.17 करोड़ से ज्यादा कर्माचारियों और पेंशनधारकों को मिलेगा।

एक जुलाई 2026 से लागू होगी योजना 

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते (डीए) और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई राहत (डीआर) की एक अतिरिक्त किस्त जारी करने को मंजूरी दे दी है। यह एक जुलाई 2026 से लागू होगी।

बढ़ती कीमतों की भरपाई के लिए डीए/डीआर में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इससे मूल वेतन/पेंशन पर डीए/डीआर की दर 63 प्रतिशत हो गई है, जो कि पहले 60 प्रतिशत थी। महंगाई भत्ते और महंगाई राहत दोनों में बढ़ोतरी के कारण सरकारी खजाने पर सालाना 10,016.10 करोड़ रुपए का कुल बोझ पड़ेगा। इसे केंद्र सरकार की ओर से कर्मचारियों के लिए दीपावली पर तोहफा माना जा रहा है, क्योंकि इसका फायदा केंद्र सरकार के लगभग 48.54 लाख कर्मचारियों और 68.71 लाख पेंशनभोगियों को होगा।

7वें वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है बढ़ोतरी 

बयान में आगे कहा गया कि यह बढ़ोतरी उस स्वीकृत फॉर्मूले के अनुसार है, जो 7वें केंद्रीय वेतन आयोग की सिफारिशों पर आधारित है। इसके अलावा, आठवां केंद्रीय वेतन आयोग वेतन और पेंशन से जुड़े मामलों पर बातचीत कर रहा है। उम्मीद है कि इन चर्चाओं में वेतन की शर्तों और सभी संबंधित पक्षों द्वारा दिए गए सुझावों पर मुख्य रूप से ध्यान दिया जाएगा।

आठवें केंद्रीय वेतन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। इसके सदस्यों में पूर्व आईएएस अधिकारी पंकज जैन शामिल हैं, जो सदस्य-सचिव के रूप में काम कर रहे हैं। साथ ही, वित्त के प्रोफेसर और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य पुलक घोष भी इसके सदस्य हैं। इन चर्चाओं के दौरान मिले सुझावों को आयोग की सिफारिशें तैयार करते समय ध्यान में रखा जाएगा। आयोग के इस काम का असर एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वित्तीय हितों पर पड़ सकता है।

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