नई दिल्ली: चीन के बाजारों का आकर्षण बढ़ने और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की चिंता के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने इस महीने अबतक शेयर बाजारों से शुद्ध रूप से 15,236 करोड़ रुपये की निकासी की है।हालांकि, पिछले चार कारोबारी सत्रों में एफपीआई लिवाल रहे हैं। इससे पहले दिसंबर में एफपीआई ने शेयर बाजारों में 11,119 करोड़ रुपये और नवंबर में 36,239 करोड़ रुपये डाले थे। कुल मिलाकर, एफपीआई ने 2022 में भारतीय शेयर बाजारों से 1.21 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसकी प्रमुख वजह वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा आक्रामक तरीके से ब्याज दरों में वृद्धि, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जिंसों के ऊंचे दाम हैं।
एफपीआई के निवेश के लिहाज से 2022 सबसे खराब साल रहा है। 2022 में उन्होंने शेयरों से जमकर निकासी की, जबकि इससे पिछले तीन साल के दौरान उन्होंने शेयरों में शुद्ध निवेश किया था। डिपॉजिटरी के आंकड़ों के मुताबिक, एफपीआई ने इस महीने (20 जनवरी तक) 15,236 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की है। एफपीआई की बिकवाली की प्रमुख वजह लॉकडाउन के बाद चीन के बाजारों का आक्रामक तरीके से फिर से खुलना है। मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक- प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि शून्य कोविड नीति के चलते चीन ने सख्त लॉकडाउन लागू किया। इससे चीन के बाजार नीचे आ गए। ऐसे में मूल्य के दृष्टिकोण से वहां निवेश करना अधिक आकर्षक हो गया है।
उन्होंने कहा कि इस वजह से एफपीआई भारत जैसे ऊंचे मूल्यांकन वाले बाजारों से निकासी कर रहे हैं। श्रीवास्तव ने कहा कि इसके अलावा अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने की चिंता लगातार बनी हुई है, जिसे अमेरिका के निराशाजनक आंकड़ों से और समर्थन मिला है।जियोजीत फाइनेंशियल र्सिवसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी के विजयकुमार ने कहा, ‘‘एफपीआई द्वारा निरंतर बिकवाली थोड़ी आश्चर्यजनक है क्योंकि डॉलर इंडेक्स में लगातार गिरावट आ रही है। डॉलर इंडेक्स 2022 के 114 के शिखर से घटकर अब लगभग 103 रह गया है। गिरता हुआ डॉलर उभरते बाजारों के लिए अनुकूल है और इसलिए भारत को निवेश प्राप्त करना चाहिए था।’’ उन्होंने कहा कि हो यह रहा है कि एफपीआई चीन, हांगकांग, दक्षिण कोरिया और थाइलैंड जैसे सस्ते बाजारों में भारी निवेश कर रहे हैं और वे अपेक्षाकृत महंगे बाजार भारत में बिकवाली कर रहे हैं। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने इस महीने शेयरों के अलावा ऋण या बॉन्ड बाजार से भी 1,286 करोड़ रुपये की निकासी की है।
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