
नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंकों में से एक HDFC Bank एक बार फिर बड़े विवाद के केंद्र में है। मीडिया रिपोर्ट्स और आंतरिक जांच से जुड़े दावों के अनुसार, बैंक पर महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (MSRDC) को तय नियमों से अधिक ब्याज देने के लिए एक वैकल्पिक वित्तीय संरचना अपनाने का आरोप सामने आया है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ने कथित तौर पर करीब 45 करोड़ रुपये की राशि को मार्केटिंग और रोड सेफ्टी अवेयरनेस कैंपेन के खर्च के रूप में दर्शाया, जबकि वास्तविक उद्देश्य ब्याज दरों में अंतर को समायोजित करना बताया जा रहा है।
MSRDC डील से शुरू हुआ मामला
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2021 में MSRDC और बैंक के बीच बड़े डिपॉजिट सौदे पर बातचीत शुरू हुई थी। MSRDC ने अपनी जमा राशि पर लगभग 6.01% ब्याज की मांग रखी थी, जबकि उस समय बैंक की सामान्य दरें इससे काफी कम थीं। प्रस्तावित डील में करीब 25,000 करोड़ रुपये की जमा राशि शामिल थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि नियामकीय प्रतिबंधों के चलते बैंक सीधे उच्च ब्याज दर देने में असमर्थ था, जिसके बाद कथित रूप से एक वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई गई।
मार्केटिंग खर्च के रूप में भुगतान दिखाने का आरोप
आंतरिक जांच रिपोर्ट के अनुसार, 2023-24 और 2024-25 के दौरान लगभग 39.7 करोड़ रुपये को रोड सेफ्टी कैंपेन और मार्केटिंग गतिविधियों के नाम पर खर्च दिखाया गया। इन खर्चों का भुगतान स्थानीय वेंडर्स के माध्यम से किया गया।
जांच में कई अनियमितताओं का भी उल्लेख किया गया, जैसे समान तस्वीरों का बार-बार उपयोग और कार्यक्रमों के ठोस रिकॉर्ड या प्रमाण का अभाव। बैंक के भीतर ही यह स्वीकारोक्ति भी सामने आई कि ये भुगतान वास्तविक मार्केटिंग गतिविधियों के बजाय व्यावसायिक समझौते का हिस्सा थे।
प्रबंधन और गवर्नेंस पर सवाल
रिपोर्ट्स में बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं, जिनमें प्रबंधन स्तर पर निगरानी और आंतरिक नियंत्रण को लेकर गंभीर चिंताएं शामिल हैं। यह भी कहा गया है कि यह पूरी व्यवस्था पारंपरिक बैंकिंग प्रक्रियाओं से बाहर थी, जिससे रेगुलेटरी अनुपालन पर सवाल खड़े हुए।
गौरतलब है कि इस पूरे विवाद के बीच बैंक नेतृत्व में भी बदलाव की चर्चाएं रही हैं। मार्च 2026 में चेयरमैन के इस्तीफे को लेकर भी इसे एक संभावित कारण के रूप में जोड़ा जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
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नियामक एजेंसियों की चुप्पी बरकरार
अब तक इस मामले पर न तो भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और न ही HDFC Bank की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी किया गया है। हालांकि, यह मामला देश के बैंकिंग सेक्टर में कॉर्पोरेट गवर्नेंस, पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन को लेकर नई बहस जरूर छेड़ रहा है।