नई दिल्ली: भारतीय विमानन क्षेत्र की प्रमुख कंपनी इंडिगो ने 2025-26 के वित्तीय वर्ष में अपनी अंतरराष्ट्रीय सेवाओं का विस्तार करने की योजना की घोषणा की है। कंपनी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) पीटर एल्बर्स ने शुक्रवार को कहा कि इंडिगो आगामी वित्तीय वर्ष में लंदन, एथेंस, एम्स्टर्डम, मैनचेस्टर, कोपेनहेगन, और सिएम रीप जैसे प्रमुख शहरों के लिए कुल 10 नई सीधी अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू करेगी। इन उड़ानों के साथ, इंडिगो की अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को और मजबूती मिलेगी, और कंपनी की महत्वाकांक्षी योजना भारत को एक प्रमुख ‘कनेक्टिंग’ हब बनाने की दिशा में एक और कदम होगा। इंडिगो की एयरलाइन सेवा पहले ही 40 से अधिक देशों में फैली हुई है, और अब यह योजना उस विस्तार को और गति देने का काम करेगी।
पीटर एल्बर्स ने बताया कि जुलाई 2025 से कंपनी अपने पट्टे पर लिए गए नए बोइंग 787-9 विमानों के साथ मुंबई से मैनचेस्टर और एम्स्टर्डम के लिए सीधी उड़ानों की शुरुआत करेगी। यह उड़ानें इंडिगो के लिए लंबी दूरी की उड़ानों की शुरुआत भी होंगी, जिससे कंपनी के अंतरराष्ट्रीय परिचालन में एक नया अध्याय जुड़ जाएगा।
एल्बर्स ने भारतीय विमानन क्षेत्र के बढ़ते बाजार की संभावनाओं को भी रेखांकित किया, जहाँ बढ़ती यात्री मांग को बुनियादी ढांचे के विस्तार से पूरा किया जा रहा है। उनकी राय में, भारत के लिए यह एक शानदार अवसर है, और अगले कुछ वर्षों में भारत अंतरराष्ट्रीय हवाई यातायात के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर सकता है।
इंडिगो का वर्तमान बेड़ा 430 से अधिक विमानों का है, और कंपनी रोजाना 2,300 से अधिक उड़ानें संचालित करती है। इसके अलावा, इंडिगो की आय अब 10 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुकी है। हालांकि, एल्बर्स ने भारत के अंतरराष्ट्रीय यातायात में घरेलू विमानन कंपनियों की हिस्सेदारी को लेकर एक दिलचस्प आंकड़ा भी पेश किया। वर्तमान में भारतीय विमानन कंपनियों की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत है, जबकि बाकी 55 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस द्वारा संचालित की जाती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारतीय कंपनियों को अधिक अवसर मिल सकते हैं।
इंडिगो के CEO ने यह भी साझा किया कि कंपनी की महिला पायलटों की संख्या सबसे अधिक है, जो कुल पायलट संख्या का लगभग 15 प्रतिशत है। यह भारतीय विमानन उद्योग में महिला सशक्तिकरण का एक बेहतरीन उदाहरण है। इसके अलावा, इंडिगो जून 2025 में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अंतरराष्ट्रीय वायु परिवहन संघ (IATA) की 81वीं वार्षिक आम बैठक की मेजबानी करेगी, जो 42 वर्षों बाद भारत में हो रही है।
इस ऐतिहासिक बैठक के जरिए इंडिगो और भारत का विमानन क्षेत्र वैश्विक ध्यान आकर्षित करने में सफल हो सकता है। यह अवसर न केवल इंडिगो के लिए, बल्कि पूरे भारतीय विमानन क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो सकता है। इंडिगो की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय पहुंच और भारत के विमानन उद्योग में इसके योगदान को देखते हुए आने वाले वर्षों में भारतीय यात्रियों के लिए और भी नई उड़ान सेवाएं और विकल्प खुल सकते हैं।

