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एस जयशंकर बोले, भारत-न्यूजीलैंड FTA एक ऐतिहासिक कदम

India New Zealand FTA Jaishankar

India New Zealand FTA Jaishankar

भारत और न्यूजीलैंड के बीच सोमवार को हुआ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) आर्थिक सहयोग के एक नए दौर की शुरुआत करता है। यह समझौता न केवल व्यापार को आसान बनाएगा, बल्कि भारतीय निर्यातकों, उद्योगों और सेवा क्षेत्र के लिए अभूतपूर्व अवसर भी पैदा करेगा।

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए ऐतिहासिक करार दिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जयशंकर ने इस समझौते से मिलने वाले लाभ पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, यह समझौता केवल व्यापारिक लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक सहयोग, रणनीतिक विश्वास और भविष्य की साझेदारी के नए आयाम खोलता है।

इस एफटीए के माध्यम से भारत और न्यूजीलैंड के बीच आर्थिक संबंधों को नई गति मिलने की उम्मीद है। व्यापार बाधाओं में कमी, टैरिफ में राहत और बाजार तक बेहतर पहुंच से दोनों देशों के निर्यातकों को बड़ा लाभ मिलेगा। भारतीय उत्पाद—विशेषकर कृषि, टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स और आईटी सेवाओं—को न्यूजीलैंड के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धात्मक अवसर मिलेंगे, वहीं न्यूजीलैंड के डेयरी, कृषि और शिक्षा क्षेत्र को भारत में नए अवसर प्राप्त होंगे।

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इस एफटीए की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लागू होते ही भारत के 100 फीसदी वस्तु निर्यात पर शून्य शुल्क (जीरो ड्यूटी) लागू होगा। इसका मतलब है कि भारतीय उत्पाद अब न्यूजीलैंड के बाजार में बिना किसी टैरिफ बाधा के प्रवेश कर सकेंगे। साथ ही, सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्ति से व्यापारिक प्रक्रियाएं और अधिक सरल और पारदर्शी बनेंगी। निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विदेशी व्यापार नीति के तहत फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म भी लागू किया जाएगा, जिससे इनपुट्स की उपलब्धता और सप्लाई चेन को मजबूती मिलेगी।

यह समझौता खास तौर पर किसानों, एमएसएमई, कारीगरों, महिलाओं और युवाओं के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकता है। कृषि उत्पादों—जैसे फल, सब्जियां, कॉफी, मसाले और अनाज—को नए बाजार मिलेंगे, जिससे किसानों की आय में वृद्धि की संभावना है। वहीं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) को वैश्विक सप्लाई चेन से जुड़ने का अवसर मिलेगा, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।

रोजगार सृजन के लिहाज से भी यह एफटीए काफी महत्वपूर्ण है। श्रम-प्रधान क्षेत्रों—जैसे टेक्सटाइल, अपैरल, लेदर और फुटवियर—को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर—जैसे ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और प्लास्टिक्स—में भी निवेश और उत्पादन बढ़ेगा। फार्मास्यूटिकल्स और केमिकल्स जैसे क्षेत्रों को भी निर्यात विस्तार का अवसर मिलेगा।

सेवा क्षेत्र में यह समझौता नए आयाम खोलेगा।आईटी-आईटीईएस, वित्त, शिक्षा, पर्यटन और ऑडियो-विजुअल सेक्टर में सहयोग बढ़ेगा। भारत को एक कुशल कार्यबल (स्किल्ड वर्कफोर्स) के प्रमुख आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित होने का अवसर मिलेगा। खास बात यह है कि भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए अभूतपूर्व अवसर खुलेंगे।

इस समझौते के तहत 5,000 ‘अस्थायी रोजगार प्रवेश वीजा’ भारतीय कुशल पेशेवरों के लिए उपलब्ध होंगे, जिनकी वैधता 3 वर्षों तक हो सकती है। इसके अलावा, 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच और लगभग 139 सेवा उप-क्षेत्रों में “मोस्ट फेवर्ड नेशन” का दर्जा भारत के सेवा निर्यात को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।

महिला और युवा उद्यमियों के लिए भी यह एफटीए बेहद लाभकारी साबित होगा। एसएमई सहयोग, इनक्यूबेटर, एक्सेलेरेटर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से उन्हें वैश्विक बाजार तक पहुंचने के नए अवसर मिलेंगे।

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