नई दिल्ली: रिलायंस जियो एक बार फिर भारतीय दूरसंचार क्षेत्र में तकनीकी नवाचार की दिशा में कदम बढ़ा रही है। कंपनी ने दूरसंचार विभाग (DoT) से 26 गीगाहर्ट्ज (GHz) बैंड में वाईफाई सेवाओं के संचालन के लिए स्पेक्ट्रम के इस्तेमाल की आधिकारिक अनुमति मांगी है। इस प्रस्ताव को पिछले सप्ताह दूरसंचार विभाग की तकनीकी इकाई, टेलीकॉम इंजीनियरिंग सेंटर (TEC) के पास भेजा गया है।
सूत्रों के अनुसार, जियो इस हाई-फ्रीक्वेंसी बैंड का इस्तेमाल करके अल्ट्रा-हाई-स्पीड वाईफाई सेवाएं देने की योजना बना रही है, जो शहरी क्षेत्रों में 5जी के साथ वाईफाई की क्षमता को भी बढ़ा सकता है। हालांकि, नियामकीय नियमों के तहत यदि 5जी स्पेक्ट्रम को किसी अन्य तकनीक के लिए इस्तेमाल किया जाना है, तो संबंधित कंपनी को पहले से मंजूरी लेनी होती है।
2022 में हुई स्पेक्ट्रम नीलामी के दौरान रिलायंस जियो ने 88,078 करोड़ रुपये की बोली लगाकर कुल स्पेक्ट्रम का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हासिल किया था। यह स्पेक्ट्रम 5जी सेवाओं के लिए आवंटित किया गया था, और अब कंपनी उसी स्पेक्ट्रम का उपयोग वाईफाई जैसी वैकल्पिक तकनीक के लिए करना चाहती है।
एनआईए (नोटिस इन्वाइटिंग एप्लीकेशन) दस्तावेज के अनुसार, किसी भी नई तकनीक को लागू करने से कम से कम छह महीने पहले उसकी जानकारी देना आवश्यक होता है। साथ ही, उस तकनीक का आईटीयू, टीईसी या अन्य अंतरराष्ट्रीय मानक संस्थानों द्वारा मान्यता प्राप्त होना भी जरूरी है।
यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो जियो देश में हाई-स्पीड, मिलिमीटर वेव आधारित वाईफाई सेवाओं को शुरू करने वाली अग्रणी कंपनियों में से एक बन सकती है। यह पहल डिजिटल इंडिया मिशन और भारत में अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी लाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। जियो की ओर से इस विषय पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं मिली है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ इसे भारत के वाईफाई इकोसिस्टम में एक संभावित क्रांति के रूप में देख रहे हैं।
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