Last Updated: September 22, 2026

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कमजोर हुआ नक्सलवाद, 10 साल में 10 हजार से ज्यादा माओवादियों ने टेके घुटने

March 29, 2026

कमजोर हुआ नक्सलवाद, 10 साल में 10 हजार से ज्यादा माओवादियों ने टेके घुटने

नेशनल डेस्क: भारत में लंबे समय से चल रहा नक्सलवाद अब कमजोर पड़ता दिख रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सुरक्षा बलों की सख्ती और सरकार की नई नीतियों के कारण इस समस्या पर काफी हद तक काबू पाया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, बीते 10 साल में 10 हजार से ज्यादा माओवादी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। केंद्र सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने के लिए 31 मार्च तक का लक्ष्य भी तय किया था।

तेजी से बढ़ रहे आत्मसमर्पण के मामले

आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में करीब 2,300 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। वहीं 2026 के पहले तीन महीनों में ही 630 से ज्यादा उग्रवादी हिंसा का रास्ता छोड़ चुके हैं। पहले अलग-अलग स्तर पर चल रही नीतियों की जगह अब सरकार ने एक मजबूत और एकजुट रणनीति अपनाई है, जिसका असर साफ दिखाई दे रहा है।

‘लाल गलियारे’ में बढ़ा विकास

देश के जिन इलाकों को पहले लाल गलियारा कहा जाता था जैसे बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश वहां अब हालात बदल रहे हैं। पहले इन क्षेत्रों में ठेकेदार काम करने से डरते थे, लेकिन अब सरकार ने सीमा सड़क संगठन को सड़क निर्माण की जिम्मेदारी दी है। इन इलाकों में 15,000 किलोमीटर से ज्यादा सड़कें बनाई जा चुकी हैं, जिनमें से 12,250 किलोमीटर सड़कें पिछले 10 साल में ही तैयार हुई हैं। इसके साथ ही कई महत्वपूर्ण पुलों का निर्माण भी किया गया है, जिससे कनेक्टिविटी बेहतर हुई है।

सुरक्षा व्यवस्था हुई मजबूत

सुरक्षा के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। साल 2014 में जहां केवल 66 मजबूत पुलिस स्टेशन थे, अब उनकी संख्या बढ़कर 586 हो गई है। पिछले 6 वर्षों में 361 नए सुरक्षा कैंप स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा ऑपरेशन को मजबूत बनाने के लिए 68 नाइट-लैंडिंग हेलीपैड भी बनाए गए हैं। इन कदमों का असर यह हुआ कि नक्सल प्रभावित पुलिस स्टेशनों की संख्या 330 से घटकर सिर्फ 52 रह गई है। खास बात यह है कि छत्तीसगढ़ में अब माओवादी आंदोलन बिना किसी बड़े नेता के रह गया है।

लोगों तक पहुंच रहीं सरकारी योजनाएं

नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास योजनाओं का लाभ आम लोगों तक पहुंचने लगा है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घरों की संख्या 92,847 से बढ़कर 2.54 लाख से ज्यादा हो गई है। इसके साथ ही आधार कार्ड और आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की संख्या में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। शिक्षा के क्षेत्र में 250 एकलव्य स्कूलों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 179 स्कूल चालू हो चुके हैं। इसके अलावा 11 केंद्रीय विद्यालय और 6 नवोदय विद्यालय भी इन क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं।

रोजगार और कनेक्टिविटी पर फोकस

युवाओं को रोजगार देने के लिए 48 जिलों में आईटीआई और कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं। इससे नक्सलियों की नई भर्ती पर रोक लगाने में मदद मिली है। संचार सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए करीब 9,000 मोबाइल टावर लगाए गए हैं। वहीं रेलवे नेटवर्क भी तेजी से बढ़ाया जा रहा है। बस्तर क्षेत्र को छत्तीसगढ़ के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए नई रेल लाइन बिछाई गई है, और दंतेवाड़ा से मुनुगुरु तक नई रेल लाइन का सर्वे भी पूरा हो चुका है।

नक्सलवाद पर काबू की ओर देश

इन सभी प्रयासों के कारण नक्सलवाद अब अपने कमजोर दौर में पहुंच गया है। सुरक्षा, विकास और पुनर्वास इन तीनों मोर्चों पर काम करने से हालात में बड़ा बदलाव आया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस समस्या पर और प्रभावी तरीके से नियंत्रण पाया जा सकेगा।

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