नई दिल्ली: अगर मोबाइल फोन उपभोक्ता के नाम पर खरीदा गए सिम कार्ड का इस्तेमाल साइबर धोखाधड़ी या किसी अवैध गतिविधि में होता है, तो उसके लिए मूल ग्राहक को भी कानूनी रूप से जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। सोमवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई। दूरसंचार विभाग ने कहा कि मोबाइल फोन की विशिष्ट पहचान संख्या आईएमईआई में छेड़छाड़ वाले उपकरणों का उपयोग, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम लेना या दूसरों को सिम सौंपना गंभीर उल्लंघन है और इसके दुष्परिणाम मूल ग्राहक पर भी लागू होंगे।
विभाग ने कहा, ‘छेड़छाड़ किए गए आईएमईआई नंबर वाले फोन का इस्तेमाल करना, धोखाधड़ी से सिम कार्ड खरीदना, या अपना सिम कार्ड दूसरों को देना या साइबर धोखाधड़ी के लिए उनका गलत इस्तेमाल करने वालों को सौंप देने के गंभीर कानूनी नतीजे हो सकते हैं, अगर उनके नाम पर लिए गए सिम कार्ड का बाद में गलत इस्तेमाल होता है, तो असली ग्राहक को भी दोषी माना जा सकता है।’
इसके साथ ही दूरसंचार विभाग ने ग्राहकों से कॉलिंग लाइन आइडैंटिटी (सीएलआई) या पहचान बदलने वाले दूसरे एप्प एवं वैबसाइट का उपयोग न करने की हिदायत भी दी है। बयान के मुताबिक, दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत मोबाइल उपयोगकर्ता की पहचान में मददगार आईएमईआई एवं अन्य तरीकों से छेड़छाड़ पर 3 वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपए तक का जुर्माना हो सकता है।
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