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पीएमएवाई से गरीबों को मिला पक्का घर, भारत ने दुनिया को दिखाया मॉडल

PMAY Housing Model India

PMAY Housing Model India

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शुरू की गई भारत की शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबों के लिए चलाई जा रही आवास योजनाएं, अब विकासशील देशों के समूह ‘ग्लोबल साउथ’ के लिए एक उदाहरण बनती जा रही हैं। ये योजनाएं सामाजिक समावेशन, लैंगिक न्याय और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी हैं।

कोलंबो स्थित एशियाई न्यूज पोस्ट में प्रकाशित एक लेख के अनुसार भारत में ‘सभी के लिए आवास’ अभियान को अब मानवाधिकार के नजरिए से देखा जा रहा है। इसका उद्देश्य गरीब नागरिकों को सिर्फ घर देना ही नहीं, बल्कि उन्हें समानता, सामाजिक सुरक्षा और आत्मसम्मान भी प्रदान करना है। इस ढांचे में महिलाओं के नाम पर घर का स्वामित्व देना एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, क्योंकि इससे महिलाओं को आश्रित नहीं बल्कि अधिकार प्राप्त संपत्ति मालिक के रूप में मान्यता मिलती है।

लेख में कहा गया है कि प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण और प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी, साथ ही पीएमएवाई शहरी 2.0 और क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी योजना मिलकर यह दिखाते हैं कि भारत में आवास नीति को समावेशन, लैंगिक समानता और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को सशक्त बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।

ग्रामीण भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत पक्का घर केवल रहने की सुविधा ही नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और सामाजिक भागीदारी का प्रतीक बन गया है। योजना के तहत जारी दिशा-निर्देशों में यह स्पष्ट किया गया है कि घर के स्वामित्व में महिलाओं का नाम शामिल होना चाहिए। महिलाओं को घर की अकेली मालिक या पुरुष सदस्यों के साथ संयुक्त मालिक बनाया जा सकता है। यहां तक कि जिन घरों को पहले केवल पुरुषों के नाम पर मंजूरी मिली थी, उनमें भी बाद में महिलाओं का नाम जोड़ा जा सकता है।

इस महिला-केंद्रित नीति का असर अब घरों के स्वामित्व के आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के तहत बने लगभग चार में से तीन घर महिलाओं के नाम पर हैं और सरकार का लक्ष्य इस योजना में 100 प्रतिशत महिला स्वामित्व हासिल करना है।

लेख में बताया गया है कि महिला के नाम पर घर होने से परिवार के भीतर उसकी निर्णय लेने की स्थिति मजबूत होती है। इससे उसे घर से बेदखल करना या छोड़ देना कठिन हो जाता है और उसके पास एक ठोस संपत्ति होती है, जिसका उपयोग वह लोन लेने, रोजगार या सामाजिक पहचान बढ़ाने के लिए कर सकती है।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना के तहत बने घरों को स्वच्छता, पीने के पानी, बिजली, एलपीजी और अब सौर ऊर्जा जैसी अन्य योजनाओं से भी जोड़ा जा रहा है। इससे लाभार्थियों को सिर्फ चार दीवारें और छत ही नहीं मिलती, बल्कि एक समग्र रहने का माहौल मिलता है, जो खासकर महिलाओं के लिए स्वास्थ्य, निजता और सुरक्षा को बेहतर बनाता है।

शहरी भारत में प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी और इसका नया संस्करण पीएमएवाई शहरी 2.0 झुग्गी बस्तियों में रहने वाले लोगों, कम आय वाले कामगारों और मध्यम वर्ग के लिए किफायती घर उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रहे हैं।

इस योजना की शुरुआत से ही यह नियम लागू किया गया है कि आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) और निम्न आय वर्ग (एलआईजी) श्रेणी में घर की मालिक या सह-मालिक परिवार की महिला सदस्य होनी चाहिए। इससे यह स्पष्ट संदेश जाता है कि सरकारी आवास सब्सिडी महिलाओं के संपत्ति अधिकार को मान्यता देने के साथ ही दी जाएगी।

लेख में यह भी स्वीकार किया गया है कि कम आय वाले शहरी परिवारों में महिलाएं अक्सर बिना भुगतान वाले घरेलू कार्यों का बोझ उठाती हैं और असुरक्षित आवास, बेदखली और खराब सुविधाओं का सबसे ज्यादा असर भी उन्हीं पर पड़ता है।

इस पूरी व्यवस्था में क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम एक वित्तीय सहायक के रूप में काम करती है, जिससे ऐसे परिवारों को औपचारिक होम लोन मिल पाता है जो सामान्य परिस्थितियों में इससे बाहर रह जाते हैं।

इस योजना के तहत आर्थिक रूप से कमजोर, निम्न आय और कुछ मध्यम आय वर्ग के पात्र लाभार्थियों को घर खरीदने, बनाने या बढ़ाने के लिए लिए गए होम लोन पर ब्याज सब्सिडी दी जाती है।

सीएलएसएस के तहत ईडब्ल्यूएस और एलआईजी श्रेणियों के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त यह है कि घर के स्वामित्व में महिला का नाम होना अनिवार्य है। यानी परिवार की कम से कम एक महिला सदस्य को घर की मालिक या सह-मालिक होना ही होगा। इससे रियायती वित्तीय सहायता सीधे महिलाओं के संपत्ति निर्माण से जुड़ जाती है और परिवारों तथा बैंकों दोनों को महिलाओं को वैध उधारकर्ता और संपत्ति धारक के रूप में स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहन मिलता है।

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