Last Updated: October 10, 2026

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रुपये ने शुरुआती कारोबार में सीमित दायरे में किया कारोबार, जानिए इसके लेटेस्ट रेट्स 

December 5, 2024

रुपये ने शुरुआती कारोबार में सीमित दायरे में किया कारोबार, जानिए इसके लेटेस्ट रेट्स 

Rupee Traded Limited Range : रुपया बृहस्पतिवार को शुरुआती कारोबार में चार पैसे मजबूत होकर 84.71 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि सकारात्मक घरेलू शेयर बाजारों से मिले समर्थन को विदेशी बाजार में अमेरिकी डॉलर की व्यापक मजबूती ने बेअसर कर दिया।

मजबूत डॉलर और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से निकट भविष्य में रुपये के दबाव में रहने की आशंका है। अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 84.72 प्रति डॉलर पर खुला और सीमित दायरे में घूमते हुए 84.71 प्रति डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले बंद भाव के मुकाबले केवल चार पैसे की बढ़त दर्शाता है।

रुपया बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 84.75 पर बंद हुआ था।  इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.05 प्रतिशत की गिरावट के साथ 106.26 पर रहा। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.10 प्रतिशत चढक़र 72.38 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा।

शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बुधवार को लिवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,797.60 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। अमेरिकी संसद में तीन दिसंबर को राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरुकता दिवस घोषित करने का प्रस्ताव पेश वाशिंगटन, पांच दिसंबर (भाषा) अमेरिका के तीन सांसदों ने भोपाल गैस त्रसदी के 40वर्ष पूरे होने पर तीन दिसंबर को राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरुकता दिवस के तौर पर मनाने का प्रस्ताव पेश किया है।

सीनेटर जेफ मर्कले, रॉन वाइडन और पीटर वेल्च द्वारा पेश प्रस्ताव का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि दुनिया में किसी अन्य समुदाय को ऐसी आपदा का सामना न करना पड़े। भोपाल स्थित यूनियन कार्बाइड कीटनाशक कारखाने से तीन दिसंबर 1984 को शहर में जहरीली गैस ‘मिथाइल आइसोसाइनेट’ का रिसाव हुआ था जिससे 72 घंटों के भीतर आठ हजार लोगों की मौत हो गई और पांच लाख से अधिक लोग स्थायी रूप से प्रभावित हुए।

इसे दुनिया की सबसे बड़ी औद्योगिक त्रसदी माना जाता है। प्रस्ताव में कहा गया है कि यूनियन कार्बाइड और उसके प्रतिनिधियों ने भारत में अदालत में उपस्थित होने के लिए बार-बार भेजे गए समन की अनदेखी की तथा भारत और अमेरिका के बीच 1942 में हुई दो प्रत्यर्पण संधियों के बाद भी उनकी उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो पाई।

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