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घरेलू खपत में सुस्ती से India के वृद्धि अनुमान में कमी: IMF Director

वाशिंगटन: अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि भारत की वृद्धि दर के अनुमान को 6.1 प्रतिशत से घटाकर 5.9 प्रतिशत करने के पीछे की मुख्य वजह घरेलू खपत में आ रही सुस्ती और आंकड़ों में हुए संशोधन हैं। आईएमएफ ने गत मंगलवार को चालू वित्त वर्ष के लिए भारत के वृद्धि दर पूर्वानुमान को घटा दिया था। इसके साथ ही मुद्राकोष ने कहा कि भारत इस गिरावट के बावजूद दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा।

मुद्राकोष के एशिया एवं प्रशांत विभाग के निदेशक कृष्ण श्रीनिवासन ने कहा कि भारत के वृद्धि दर अनुमान में कटौती के पीछे मुख्य रूप से दो कारक रहे हैं। उन्होंने कहा, “एक कारण घरेलू खपत की वृद्धि में आ रही हल्की सुस्ती है। दूसरा कारक 2019 से 2020 में आंकड़ों का संशोधन है जिससे आर्थिक स्थिति पता चलती है। महामारी से पहले स्थिति कहीं बेहतर थी। हालांकि भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामारी का प्रभाव हमारी सोच से कहीं अधिक सीमित था और पुनरुद्धार अधिक सशक्त रहा है।” श्रीनिवासन ने बृहस्पतिवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि इन सभी कारणों से उत्पादन का अंतराल कम हो रहा है।

उन्होंने कहा, “इससे पता चलता है कि पूर्वानुमान में संशोधन किस वजह से हुआ है। जहां तक जोखिम का सवाल है तो एक बार फिर इस क्षेत्र में बा‘ जोखिम अमेरिका एवं यूरोप में वृद्धि के सुस्त पड़ने से जुड़ा हुआ है।” उन्होंने कहा कि इन सभी बा‘ जोखिमों का भारतीय अर्थव्यवस्था के वृद्धि पूर्वानुमान पर असर देखने को मिल सकता है। भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो दर में वृद्धि का सिलसिला रोकने के बारे में पूछे जाने पर श्रीनिवासन ने कहा, “मौजूदा समय में 6.5 प्रतिशत की ब्याज दर काफी हद तक एक तटस्थ नीतिगत रुख है जो हमारी राय में भारत की आर्थिक स्थितियों के लिहाज से टिकाऊ है।”

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