Share Market Today: सप्ताह के अंतिम कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार दबाव में नजर आया। लगातार कई दिनों की तेजी के बाद आज, शुक्रवार को बाजार में मुनाफावसूली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांकों में गिरावट दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक टूटकर 76,850 के आसपास पहुंच गया, जबकि एनएसई निफ्टी भी करीब 175 अंक कमजोर होकर 24,000 के नीचे फिसल गया।
आईटी सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव
बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह आईटी शेयरों में आई कमजोरी रही। वैश्विक कंसल्टिंग कंपनी Accenture द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान घटाए जाने के बाद निवेशकों की चिंता बढ़ गई। कंपनी ने संकेत दिया है कि नई तकनीकों पर कॉर्पोरेट खर्च फिलहाल अपेक्षा से कम रह सकता है। इसके बाद अमेरिकी बाजार में Accenture के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसका असर भारतीय आईटी कंपनियों पर भी दिखाई दिया।
शुरुआती कारोबार में Infosys, TCS और Wipro जैसे दिग्गज शेयर लाल निशान में कारोबार करते दिखे, जिससे आईटी इंडेक्स पर दबाव बढ़ा और बाजार की धारणा कमजोर हुई।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला कारोबार
एशियाई शेयर बाजारों में शुक्रवार को मिश्रित रुख देखने को मिला। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने की खबरों से जापान और दक्षिण कोरिया के बाजारों में निवेशकों का उत्साह बना रहा। जापान का Nikkei 225 और दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स लगातार मजबूत प्रदर्शन करते हुए ऊंचे स्तरों पर कारोबार कर रहे हैं।
हालांकि, चीन, हांगकांग और ताइवान के बाजार अवकाश के कारण बंद रहे। वहीं दक्षिण कोरिया के स्मॉल-कैप इंडेक्स Kosdaq में हल्की गिरावट दर्ज की गई।
अमेरिकी बाजारों में लौटी मजबूती
गुरुवार को अमेरिकी शेयर बाजारों में अच्छी रिकवरी देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन भविष्य में दरों को लेकर सतर्क रुख बनाए रखा। इसके बावजूद निवेशकों ने बाजार में खरीदारी की, जिससे S&P 500, Nasdaq और Dow Jones तीनों प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए।
हालांकि, आज अमेरिका में Juneteenth राष्ट्रीय अवकाश के चलते शेयर और बॉन्ड बाजार बंद रहेंगे।
कच्चे तेल में नरमी
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट दर्ज की गई। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड 76 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि ब्रेंट क्रूड भी 80 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बना रहा। तेल कीमतों में नरमी भारत जैसे आयातक देशों के लिए राहत की खबर मानी जा रही है।
डॉलर इंडेक्स में हल्की कमजोरी
विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मामूली गिरावट के साथ कारोबार करता नजर आया। दूसरी ओर, भारतीय रुपया पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर बंद हुआ था, जिससे आयात लागत पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
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निवेशकों की नजर आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों, अमेरिकी फेड की नीतियों और आईटी सेक्टर की चाल पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। फिलहाल निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और अगले कुछ कारोबारी सत्रों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों पर करीबी नजर रखेंगे।
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