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शेयर बाजार में वापसी के संकेत, रुपया 91 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है: रिपोर्ट

stock market recovery signals rupee 91 per dollar forecast

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कच्चे तेल की तेजी कमजोर पड़ने और शेयरों के पीई (प्राइस-टू-अर्निंग) प्रीमियम कम होने के कारण भारतीय शेयर बाजार में दमदार रिकवरी देखने को मिल सकती है। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज ने अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया है कि भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 रुपए के स्तर पर वापस जाएगा और 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड मौजूदा 6.83 प्रतिशत से घटकर लगभग 6.65 प्रतिशत हो जाएगी और सामान्य स्थिति में आने में दो से तीन महीने लगेंगे।

रिपोर्ट में कहा गया,”निफ्टी पिछले तीन कारोबारी सत्रों में 5 प्रतिशत गिरा, जिसका मुख्य कारण लगातार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की बिकवाली थी। हमें उम्मीद है कि इस रुझान में बदलाव आएगा और भारत इस क्षेत्र में निवेश के बेहतर अवसरों में से एक बनकर उभर सकता है।”

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हालांकि, वित्त वर्ष 2027 में ब्रेंट क्रूड का औसत मूल्य 80 डॉलर प्रति बैरल रहने से भारत की जीडीपी वृद्धि घटकर 6.6 प्रतिशत हो जाएगी और मुद्रास्फीति तथा चालू खाता घाटा क्रमशः 4.3 प्रतिशत और जीडीपी के 1.7 प्रतिशत तक बढ़ जाएगा।

रिपोर्ट में बताया गया कि युद्ध के कारण अगर ब्रेंट 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक रहता है तो जीडीपी के अनुपात में चालू खाता घाटा 2.5 प्रतिशत से अधिक रह सकता है। व्यापारिक घाटा 85 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में वृद्धि हुई है, लेकिन वे अभी भी उन स्तरों से काफी नीचे हैं जो आमतौर पर इस पैमाने और अवधि के झटके को दर्शाते हैं।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 85 डॉलर प्रति बैरल पर ब्रेंट की कीमत काफी हद तक नियंत्रण में रहेगी, जबकि अगर कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाती हैं तो इसका व्यापक प्रभाव अधिक गंभीर होगा।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है, “हमारे मॉडल सिमुलेशन से पता चलता है कि मौजूदा तेल कीमतों पर, सरकार को डीजल और पेट्रोल के औसत मिश्रण पर उत्पाद शुल्क में लगभग 19.5 रुपए प्रति लीटर की कटौती करनी होगी और ओएमसी के नुकसान की पूरी भरपाई के लिए एलपीजी पर अनुमानित 1 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी खुद वहन करनी होगी।”

इस तरह की उत्पाद शुल्क कटौती से जीडीपी के लगभग 1.1 प्रतिशत का राजकोषीय खर्च आएगा।

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