
Tata Steel Receives Notice: नई दिल्ली: भारत की प्रमुख स्टील निर्माता कंपनी टाटा स्टील को केंद्र सरकार के जीएसटी अधिकारियों से एक बड़ा कारण बताओ नोटिस (SCN) प्राप्त हुआ है, जिसमें उस पर वित्त वर्ष 2018-19 से 2022-23 के दौरान 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के कथित अनुचित लाभ का आरोप लगाया गया है।
शेयर बाजार को दी गई जानकारी के मुताबिक, यह नोटिस 27 जून 2025 को केंद्रीय कर आयुक्त (लेखा परीक्षा), रांची कार्यालय द्वारा जारी किया गया और कंपनी को 28 जून को प्राप्त हुआ। नोटिस में कंपनी को निर्देश दिया गया है कि वह 30 दिनों के भीतर यह स्पष्ट करे कि ₹1,007.54 करोड़ की GST राशि उससे क्यों नहीं वसूली जानी चाहिए।
अधिकारियों का आरोप है कि कंपनी ने केंद्रीय माल और सेवा कर अधिनियम के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ उठाया है।
हालांकि, टाटा स्टील ने अपने स्पष्टीकरण में कहा है कि उसने व्यवसाय संचालन के दौरान अब तक ₹514.19 करोड़ की GST पहले ही अदा की है। नोटिस में प्रस्तावित राशि से इस अदा की गई रकम को समायोजित करने के बाद कथित देय टैक्स की शेष राशि ₹493.35 करोड़ बताई गई है।
कंपनी का बयान:
टाटा स्टील ने स्पष्ट रूप से कहा है कि उसे नोटिस में लगाए गए आरोपों में कोई तथ्य नज़र नहीं आता और कंपनी इस मुद्दे पर विधिक और तथ्यों पर आधारित अपना पक्ष समयसीमा के भीतर संबंधित अधिकारियों के समक्ष रखेगी।
वित्तीय पारदर्शिता और नियामकीय अनुपालन के मामले में प्रतिष्ठित मानी जाने वाली टाटा स्टील के खिलाफ यह नोटिस उद्योग जगत में हलचल पैदा कर सकता है, लेकिन कंपनी का आत्मविश्वास इस बात का संकेत देता है कि वह अपने रुख को मजबूती से रखने को तैयार है।
क्या है इनपुट टैक्स क्रेडिट विवाद:
इनपुट टैक्स क्रेडिट वह व्यवस्था है, जिसके तहत कारोबारी अपने द्वारा खरीदे गए इनपुट पर चुकाए गए GST को आउटपुट टैक्स से समायोजित कर सकते हैं। कर विभाग का कहना है कि टाटा स्टील ने इसका अनुचित लाभ लिया है, जबकि कंपनी इस दावे को गलत ठहरा रही है।
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