Last Updated: September 22, 2026

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टेलीकॉम से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी कंपनी बन रहा जियो, भारत से दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी

September 22, 2026

टेलीकॉम से आगे बढ़कर टेक्नोलॉजी कंपनी बन रहा जियो, भारत से दुनिया तक पहुंचाने की तैयारी

स्वदेशी तकनीक, बौद्धिक संपदा और एआई पर फोकस; 6,817 पेटेंट दाखिल, 1,009 को वैश्विक मंजूरी

चंडीगढ़: जियो, जिसने10 साल पहले भारत के कनेक्टिविटी परिदृश्य को बदल दिया था, अब खुद को सिर्फ कनेक्टिविटी कंपनी तक सीमित नहीं रखना चाहता। कंपनी अपने अगले चरण में टेक्नोलॉजी कंपनी के रूप में पहचान बनाने की दिशा में बढ़ रही है। इसका फोकस स्वदेशी तकनीक, बौद्धिक संपदा,आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म्स पर है। जियो का लक्ष्य भारत में विकसित तकनीक को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने के बाद वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना है।

अपने शुरुआती दशक के अधिकांश समय के लिए जियो की कहानी ग्राहक संख्या, डेटा खपत, नेटवर्क विस्तार और मोबाइल इंटरनेट की लागत में भारी कटौती से परिभाषित हुई। अब कंपनी नेटवर्क चलाने के लिए अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर, डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और इंजीनियरिंग क्षमता विकसित कर रही है। जियो के लिए तकनीक अब सिर्फ नेटवर्क का हिस्सा नहीं, बल्कि खुद एक उत्पाद बनती जा रही है। जियो प्लेटफॉर्म्स के मैनेजिंग डायरेक्टर आकाश अंबानी ने कंपनी की 10वीं वर्षगांठ पर कहा कि अब जियो एक टेलीकॉम कंपनी से कहीं ज़्यादा है। कंपनी भारत में कनेक्टिविटी, डिजिटल उत्पाद, एंटरप्राइज सॉल्यूशन और एआई से जुड़ी तकनीक विकसित कर रही है। उनका कहना है कि लक्ष्य तकनीक को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाने के साथ इसे वैश्विक बाजारों में ले जाना और भारत को तकनीक बनाने वाले देश के तौर पर मजबूत करना है।

नेटवर्क ऑपरेट करने से लेकर नेटवर्क निर्माण तक
जियो ने अपना 5जी कोर (Core) और ओएसएस/बीएसएस (OSS/BSS) सिस्टम विकसित किया । इसके बाद कंपनी ने इसे और बढ़ाया और कोर, रेडियो और ऑपरेशन्स सॉफ़्टवेयर को शामिल कर एक एंड-टू-एंड 5जी टेक्नोलॉजी स्टैक तैयार किया। यह स्टैक स्टैंडअलोन 5जी पर आधारित है और बड़े स्तर पर इसकी टेस्टिंग की गई है । अक्टूबर 2022 से दिसंबर 2023 के बीच कंपनी ने पूरे देश में 5जी कवरेज हासिल कर ली। मार्च 2026 तक जियो के 5जी यूजर्स की संख्या 26.8 करोड़ से ज्यादा हो गई थी और उसके नेटवर्क पर कुल वायरलेस ट्रैफिक में 5जी की हिस्सेदारी करीब 55 फीसदी थी। रिलायंस की वित्त वर्ष 2025-26 की रिपोर्ट के मुताबिक, जियो का कुल ग्राहक आधार 52.4 करोड़ से ज्यादा था। करोड़ों ग्राहकों वाले लाइव नेटवर्क पर तकनीक का इस्तेमाल और परीक्षण कंपनी के लिए एक बड़ा तकनीकी फायदा माना जा रहा है।

6,817 पेटेंट दाखिल, इंजीनियरिंग टीम में 11 हजार से ज्यादा लोग
जियो की ट्रांजिशन का एक बड़ा संकेत उसके पेटेंट भी हैं। 31 मार्च 2026 तक जियो प्लेटफॉर्म्स और उसकी सहायक कंपनियों ने कुल 6,817 पेटेंट दाखिल किए थे। इनमें 4जी, 5जी, 6जी, एआई और क्लाउड से जुड़ी तकनीक शामिल है। इनमें से 1,009 पेटेंट को विश्व स्तर पर मंजूरी मिल चुकी है। कंपनी की इंजीनियरिंग और टेक्नोलॉजी टीम में 11,303 लोग हैं, जो उसके कुल कर्मचारियों का करीब 40 फीसदी हिस्सा है।

भारत की जरूरतों से निकली तकनीक
जियो का फोकस ऐसी तकनीक बनाने पर भी है जो भारत जैसे बड़े और विविध परिस्थितियों वाले देश में काम कर सके। होम ब्रॉडबैंड के लिए जियो ने प्रोप्राइटरी पॉइंट-टू-मल्टीपॉइंट अनलाइसेंस्ड बैंड रेडियो (यूबीआर) टेक्नोलॉजी विकसित की है। इससे उन जगहों पर फाइबर जैसी ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जा सकती है, जहां पारंपरिक फाइबर बिछाना मुश्किल या महंगा है। मार्च 2026 तक जियो के 2.7 करोड़ से ज्यादा फिक्स्ड ब्रॉडबैंड कनेक्शन थे और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड बाजार में उसकी हिस्सेदारी करीब 43 फीसदी थी। यही सिद्धांत इसके पुरे टेलीकॉम पोर्टफोलियो में भी देखा जा सकता है। कंपनी के रेडियो प्रोडक्ट्स में मैक्रो बेस स्टेशन, आउटडोर और इनडोर स्मॉल सेल, मिलीमीटर-वेव प्रोडक्ट्स और इंटीग्रेटेड 5जी-वाई-फाई टेक्नोलॉजी शामिल हैं। इसने एक कॉम्पैक्ट स्टैंडअलोन प्राइवेट-नेटवर्क सॉल्यूशन, “5जी -इन-अ-बॉक्स”, भी विकसित किया है।

भारत से वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की तैयारी
जियो अब अपनी मोबाइल कनेक्टिविटी, होम ब्रॉडबैंड और मैनेज्ड ऑटोनॉमस कनेक्टिविटी टेक्नोलॉजी स्टैक को वैश्विक स्तर पर पेश करने की दिशा में बढ़ रहा है। शुरुआत में जियो की अपनी नेटवर्क ज़रूरतों को पूरा करने के लिए विकसित की गई तकनीक, आगे चलकर ऐसी चीज़ बन सकती है जिसे कंपनी अन्य ऑपरेटरों और इंटरप्राइजेज को बेचे। इस प्रस्ताव में एक खास फ़ायदा है, जियो की नेटवर्क टेक्नोलॉजी का मूल्यांकन करने वाला कोई ग्लोबल टेलीकॉम ऑपरेटर किसी ऐसी चीज़ को नहीं खरीद रहा होगा जो सिर्फ लैब में बनी हो, पर वह ऐसी टेक्नोलॉजी को आंकेगा जो 52.4 करोड़ से ज़्यादा ग्राहकों को सेवा देने वाले नेटवर्क पर काम कर रही है और जिसने वित्त वर्ष 2025-26 में 241 एक्साबाइट का सालाना डेटा ट्रैफ़िक संभाला है।

एंटरप्राइज़, क्लाउड, एआई और 6जी
तकनीक का सफर अब कनेक्टिविटी से आगे निकल चुका है। स्टैंडअलोन 5जी, फैक्ट्रियों, अस्पतालों और पब्लिक नेटवर्क के लिए सुरक्षित नेटवर्क स्लाइस की सुविधा देता है, जबकि प्राइवेट 5जी, एज कंप्यूटिंग, क्लाउड प्लेटफॉर्म्स और ऑटोनॉमस नेटवर्क मैनेजमेंट, एंटरप्राइज़ के लिए बड़े अवसर खोलते हैं।

रिलायंस ने “एआई हर जगह, सबके लिए” के तहत कनेक्टिविटी, कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को जोड़ने की दिशा में काम करने की बात कही है। कंपनी की नवीनतम वार्षिक रिपोर्ट में प्रोप्रायटरी टेक्नोलॉजी और डिजिटल सेवाओं को जियो की रणनीति का अहम हिस्सा बताया गया है । एआई को नेटवर्क, ऑपरेशंस और कस्टमर फेसिंग प्लेटफॉर्म्स में तेजी से शामिल किया जा रहा है। कंपनी के पेटेंट पोर्टफ़ोलियो में पहले से ही 6जी शामिल है, और कंपनी भविष्य के वैश्विक मानकों को तैयार करने की प्रक्रिया में भी भाग ले रही है।

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