
एसएएस नगर। पंजाब लिट फाउंडेशन द्वारा अपनी चल रही ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ (Mothers Against Drugs) मुहिम के तहत दून इंटरनेशनल स्कूल में सेमिनार आयोजित किया गया। इस दौरान लोगों को संबोधित करते हुए पंजाब लिट फ़ाउंडेशन की सह-संस्थापक और राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की मीडिया सलाहकार सना कौशल ने कहा कि मां नशे के खिलाफ जंग में पहला कवच हैं। वही सबसे पहले अपने बच्चों के व्यवहार में बदलाव महसूस करती हैं और मदद के लिए कदम उठाती हैं।
सेमिनार पंजाब लिट फाउंडेशन द्वारा अपनी चल रही ‘मदर्स अगेंस्ट ड्रग्स’ (Mothers Against Drugs) मुहिम के तहत आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत पिछले वर्ष सितंबर में की गई थी। इस अभियान का नेतृत्व प्रसिद्ध लेखक और पूर्व राज्य सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह, सह-संस्थापक पंजाब लिट फ़ाउंडेशन, कर रहे हैं। इस पहल का उद्देश्य माताओं को सशक्त बनाना है ताकि वे पंजाब के युवाओं में बढ़ते नशे के ख़तरे के खिलाफ पहली सुरक्षा दीवार बन सकें। खुशवंत सिंह ने कहा, “मां घर की वह शक्ति हैं जो यह सुनिश्चित कर सकती हैं कि उनके बच्चे नशे के घातक जाल में न फंसें। हम इन सेमिनारों के माध्यम से उन्हें प्रारंभिक लक्षण पहचानने और सही कदम उठाने के लिए प्रशिक्षित कर रहे हैं। अगर इसे पंजाब-भर में एक आंदोलन बना दिया जाए तो यह नशे के खिलाफ लड़ाई में बड़ा परिवर्तन ला सकता है।”
उन्होंने आगे कहा, “मां अपने घरों की मुख्यमंत्री होती हैं। जब वे यह ठान लें कि अपने बच्चों को इस समस्या से बचाना है, तो इसका उन्मूलन निश्चित हो जाता है।” मीडिया से बातचीत करते हुए खुशवंत सिंह ने बताया कि पंजाब लिट फ़ाउंडेशन अब तक 3,500 से 4,000 माताओं को जागरूक कर चुका है। “हम निजी और सरकारी स्कूलों से आग्रह कर रहे हैं कि वे हमारे साथ एमओयू (MoU) करें ताकि कक्षा 8 से 12 तक के विद्यार्थियों की माताओं को लक्षित करते हुए सभी शाखाओं में ये सत्र आयोजित किए जा सकें। हमने इस मुहिम को फ़िरोज़पुर तक पहुँचाया है।”
इस अभियान की प्रेरणा ‘पीपल्स वॉक अगेंस्ट ड्रग्स’ से मिली, जो 150 किलोमीटर लंबी यात्रा थी और जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, विशेष रूप से युवा माताएँ शामिल हुईं। “उनके मन में यह सवाल था कि वे कैसे सुनिश्चित करें कि उनके बच्चे स्वस्थ रहें और नशे के प्रति ‘ना’ कहने का आत्मविश्वास रख सकें, भले ही नशा आसपास आसानी से उपलब्ध हो,” उन्होंने कहा।
सना कौशल ने परिवार के भीतर संवाद की अहमियत पर ज़ोर देते हुए कहा कि माता पिता और बच्चे दिन में कम से कम एक बार साथ भोजन करें ताकि वे यह समझ सकें कि बच्चों पर कौन-कौन से प्रभाव पड़ रहे हैं। उन्होंने कहा, “माँ की प्रवृत्ति अपने बच्चों को बचाने में अद्वितीय होती है। इन कार्यशालाओं के ज़रिए हम उसी प्रवृत्ति को और सशक्त बनाना चाहते हैं।”
प्रसिद्ध व्यवहार विशेषज्ञ गौरव गिल ने एक ऑनलाइन सत्र में माता-पिता को यह सिखाया कि बच्चों में नशे की आदत के शुरुआती व्यवहारिक संकेत कैसे पहचाने जाएँ और समय रहते क्या व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं।
दून इंटरनेशनल स्कूल की प्रिंसिपल इरा बोगरा ने कहा कि बच्चों को न केवल नशे से, बल्कि मोबाइल फ़ोन के अत्यधिक उपयोग और सोशल मीडिया पर फैल रही ग़लत सूचनाओं के दुष्प्रभाव से भी बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “इन नए ख़तरों और चुनौतियों के दौर में माता-पिता और शिक्षकों की ज़िम्मेदारी कई गुना बढ़ गई है।”
सेशन में शामिल हुई माताओं ने इस कार्यक्रम के लिए आभार जताया, जिसने उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए ज्ञान और आत्मविश्वास प्रदान किया। यह आयोजन परिवारों, स्कूलों और समुदायों की सामूहिक जिम्मेदारी को रेखांकित करता है और एक स्वस्थ, सुरक्षित समाज के निर्माण के प्रति पंजाब लिट फाउंडेशन की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।