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‘गोद लेने वाली माताओं को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव’, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

Adoptive mothers get 12 weeks maternity leave, Supreme Court

Adoptive mothers get 12 weeks maternity leave, Supreme Court

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में गोद लेने वाली माताओं के अधिकारों को मजबूत किया है। कोर्ट ने कहा कि अब बच्चे की उम्र चाहे कुछ भी हो, हर गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते की मैटरनिटी लीव मिलेगी। पहले कानून के तहत यह छुट्टी सिर्फ उन महिलाओं को मिलती थी, जो 3 महीने से कम उम्र के बच्चे को गोद लेती थीं। कोर्ट ने इस नियम को गलत और भेदभावपूर्ण बताते हुए खत्म कर दिया।

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सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि मां, मां होती है- चाहे बच्चा जन्म से हो या गोद लिया गया हो। इसलिए दोनों को बराबर अधिकार मिलने चाहिए। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 21 (जीवन का अधिकार) के आधार पर दिया गया। कोर्ट ने यह भी कहा कि मां बनने का अधिकार सिर्फ बच्चे को जन्म देने तक सीमित नहीं है, बल्कि गोद लेना भी उसी का हिस्सा है।

कोर्ट ने बच्चों के हित को सबसे जरूरी बताया

साथ ही, कोर्ट ने केंद्र सरकार से पिताओं के लिए भी पितृत्व अवकाश (Paternity Leave) पर विचार करने को कहा, ताकि बच्चों की देखभाल में मां-बाप दोनों की बराबर भागीदारी हो। कोर्ट ने खास तौर पर बच्चों के हित को सबसे जरूरी बताया। उसने कहा कि बड़े बच्चों को नए परिवार में ढलने में ज्यादा समय लगता है, इसलिए मां को उनके साथ समय बिताने का मौका मिलना चाहिए।

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हमसानंदिनी की याचिका पर आया फैसला 

यह फैसला कर्नाटक की वकील हमसानंदिनी नंदुरी की याचिका पर आया, जिसमें उन्होंने इस कानून को भेदभावपूर्ण बताया था। उनकी दलील थी कि भारत में ज्यादातर बच्चे 3 महीने से बड़े ही गोद लिए जाते हैं, इसलिए पुराना नियम व्यावहारिक नहीं था।

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