Last Updated: October 3, 2026

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अनुराग ठाकुर ने कहा- हर भारतीय को संस्कृत सीखनी चाहिए, इसके कई फायदे

April 20, 2026

अनुराग ठाकुर ने कहा- हर भारतीय को संस्कृत सीखनी चाहिए, इसके कई फायदे

नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय का उद्घाटन किया। संस्कृत भारती के केंद्रीय कार्यालय के उद्घाटन अवसर पर देश के कई प्रमुख नेताओं और विद्वानों ने संस्कृत भाषा के महत्व पर जोर दिया। संस्कृत भारती के उद्घाटन के अवसर पर भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा, “संस्कृत भारती ने पिछले चार दशकों में पूरे देश में बेहतरीन, सराहनीय और उल्लेखनीय कार्य किया है। इसकी जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह कम ही है। मैं बस इतना कहना चाहता हूं कि हर भारतीय को संस्कृत सीखनी चाहिए। इस भाषा को सीखने के कई फायदे हैं। इससे न केवल आप संस्कृत भाषा सीखेंगे, बल्कि यह आपको दूसरी भाषाओं को समझने का अवसर भी प्रदान करती है और ग्रंथों को समझना आसान होगा।”

संस्कृत भारती के दक्षिण क्षेत्र के समन्वयक अनंतकल्याण कृष्ण ने कहा, “समाज के विकास, ‘भारतम्’ की सच्ची भावना का एहसास कराने के लिए हमें अपने पाठ्यक्रम के एक हिस्से के रूप में ‘संस्कृतम्’ की आवश्यकता है, ताकि संस्कृत हर किसी तक ‘संस्कृति’ पहुंचा सके। तमिलनाडु में हमारे पास बहुत से स्वयंसेवक हैं जो संस्कृत पढ़ा रहे हैं। इसलिए, तमिलनाडु में हर कोई संस्कृत सीखने के लिए बहुत उत्सुक है। दिल्ली में स्थित इस राष्ट्रीय केंद्र के माध्यम से हम एक प्रशिक्षण केंद्र चलाएंगे। यहां हम छात्रों, गृहिणियों और बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ अपने स्वयंसेवकों को भी प्रशिक्षित करेंगे कि वे दूसरों को संस्कृत कैसे सिखाएं। इसका उद्देश्य यह है कि हम संस्कृत भाषा को जन-जन तक पहुंचा सकें। भारत की सभी क्षेत्रीय भाषाएं तभी जीवित रह पाएंगी, जब संस्कृत जीवित रहेगी। यदि संस्कृत को हटा दिया गया, तो क्षेत्रीय भाषाएं धीरे-धीरे विलुप्त हो जाएंगी।

दैनिक जीवन में अधिकाधिक अंग्रेजी शब्द प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए धीरे-धीरे एक बार संस्कृत लुप्त हो जाएगी, तो हमारी क्षेत्रीय भाषा भी लुप्त हो जाएगी। हिंदी भी लुप्त हो जाएगी। हिंदी भाषी घरों में भी लोग अंग्रेजी बोलते हैं और अंग्रेजी शब्दों का प्रयोग करते हैं। उनमें से अधिकांश शुद्ध हिंदी नहीं बोलते हैं। इसलिए हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि हम संस्कृत का प्रयोग करते रहें। संस्कृत मिश्रित हिंदी, संस्कृत मिश्रित तमिल, संस्कृत मिश्रित तेलुगु, कन्नड़, मलयालम। केवल यही इन क्षेत्रीय भाषाओं के अस्तित्व को सुनिश्चित करेगा।” एबीपीएसएसपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष लेफ्टिनेंट जनरल वी.के. चतुर्वेदी ने कहा, संस्कृत एक ऐसी भाषा है, जो विश्व की सारी भाषाओं की मूल है। माना जाए तो पूरे विश्व की मातृ भाषा है। संस्कृत के जरिए अपने भावों को आसानी से जता सकते हैं। यह भाषा पवित्र है और गलत शब्द नहीं मिलते हैं।” संस्कृत भारती के अखिल भारतीय अध्यक्ष प्रोफेसर रमेश कुमार पांडे ने कहा, “संस्कृत सबसे प्राचीन होने के साथ वैज्ञानिक भाषा है।

संस्कृत ने सभी परंपराओं को अपने में आत्मसात किया है। यह भाषा कठिन तब लगती है, जब ठीक से अभ्यास न हो।” बीएचयू के प्रो. राम नारायण द्विवेदी ने कहा, “हमारी संस्कृत भाषा भारत को परम वैभव दिला सकती है। यह विश्व बंधुत्व की धारणा करने वाली भाषा है। यह केवल भाषा नहीं है, इसमें पारंपरिक शास्त्रों का संरक्षण है।” पाणिनि संस्कृत वैदिक विश्वविद्यालय उज्जैन के कुलपति प्रो. शिवशंकर मिश्र ने कहा, “देश की सभी भाषाओं में 40 फीसदी संस्कृत का मिश्रण है। यह भाषा आसानी से समझी जा सकती है। संस्कृत संस्कार संपन्न भाषा है। भारत की संस्कृति, चिंतन और ज्ञान को आगे ले जाने के लिए संस्कृत भाषा कारगर है।”

 

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