नई दिल्ली: भारत के रजिस्ट्रार जनरल और जनगणना कमिश्नर मृत्युंजय कुमार नारायण ने बताया कि जनगणना 2027 के दौरान लोगों से जो भी व्यक्तिगत जानकारी ली जाएगी, वह पूरी तरह गोपनीय रहेगी। यह जानकारी जनगणना अधिनियम 1948 के तहत सुरक्षित होती है, इसलिए इसे न तो RTI (सूचना का अधिकार) के तहत लिया जा सकता है और न ही अदालत में सबूत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
दिल्ली में कब और कैसे होगी शुरुआत?
दिल्ली सहित कुछ राज्यों में जनगणना की प्रक्रिया दो हिस्सों में होगी। इसमें पहली प्रक्रिया है- सेल्फ-एन्यूमरेशन (खुद से जानकारी भरना), जोकि 1 अप्रैल से 15 अप्रैल तक चलेगी। इसमें लोग खुद अपनी जानकार ऑनलाइन भर सकेंगे। इसके बाद हाउस लिस्टिंग (घर-घर सर्वे) जो 16 अप्रैल से 15 मई तक चलेगी और इसमें घरों की स्थिति और सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी। हालांकि, दिल्ली के MCD क्षेत्र में यह तारीखें थोड़ी अलग हैं, 1 मई से 15 मई सेल्फ-एन्यूमरेशन और 16 मई से 14 जून हाउस लिस्टिंग।
जनगणना के दो चरण क्या हैं?
पहला चरण – हाउस लिस्टिंग (HLO):
-घर कैसा है (पक्का/कच्चा)
-पानी, बिजली, शौचालय जैसी सुविधाएं
-घर में मौजूद संपत्ति (जैसे टीवी, वाहन आदि)
-इसमें किसी व्यक्ति की निजी जानकारी नहीं ली जाएगी
दूसरा चरण – जनसंख्या गणना (PE):
-घर में रहने वाले हर व्यक्ति की जानकारी
-उम्र, शिक्षा, रोजगार जैसी बातें
-माइग्रेशन (कहाँ से आए)
-प्रजनन (जन्म से जुड़ी जानकारी)
-इस बार जाति की गिनती भी की जाएगी
महत्वपूर्ण बातें:
जनगणना 2027 की संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027 होगी। यह भारत की 16वीं जनगणना और आज़ादी के बाद 8वीं जनगणना है। इस बार पूरा डेटा डिजिटल तरीके से इकट्ठा किया जाएगा। सरकार ने इसके लिए लगभग 11,718 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। कर्मचारियों की ट्रेनिंग चल रही है और निर्देश 19 भाषाओं में तैयार हैं।
कुछ राज्यों में अलग तारीख क्यों?
जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे ठंडे इलाकों में बर्फबारी की वजह से काम मुश्किल होता है, इसलिए वहां जनगणना की तारीख 1 अक्टूबर 2026 रखी गई है। बता दें कि, जनगणना 2021 की तैयारी शुरू हो चुकी थी, लेकिन COVID-19 महामारी के कारण इसे रोकना पड़ा।

