नई दिल्ली: भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है, जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के बदले भारत से तीन जहाज वापस करने की मांग की थी।
MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साफ कहा कि ऐसी कोई बातचीत भारत और ईरान के बीच नहीं हुई है। उन्होंने इन रिपोर्टों को “बेबुनियाद” बताया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन तीन जहाजों की बात हो रही है, वे न तो ईरान के हैं और न ही उन पर कोई ईरानी क्रू मौजूद है। MEA के अनुसार, ये जहाज टैंकर नहीं बल्कि सामान्य जहाज हैं। इसलिए अदला-बदली की बात ही गलत है। हालांकि, भारत ने यह जरूर कहा कि वह ईरान और अन्य देशों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है ताकि होर्मुज क्षेत्र में फंसे जहाजों को सुरक्षित वापस लाया जा सके। भारत का मुख्य उद्देश्य अपने जहाजों और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
इस बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भारत ने फिर से शांति और बातचीत की अपील की है। भारत का मानना है कि इस विवाद का समाधान केवल कूटनीतिक बातचीत से ही संभव है और सभी देशों को संयम बरतना चाहिए। भारत ने संयुक्त राष्ट्र (UN) में सुधार की अपनी पुरानी मांग भी दोहराई और कहा कि वैश्विक स्तर पर बेहतर व्यवस्था के लिए इसमें बदलाव जरूरी है। इसके अलावा, BRICS समूह को लेकर भी भारत ने कहा कि इस विवाद में कई सदस्य देशों के शामिल होने से सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है, लेकिन भारत सभी पक्षों से बातचीत बनाए हुए है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में यूरोप के नेताओं के साथ भी पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। साथ ही, ओमान और इराक में हुई घटनाओं में प्रभावित भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार लगातार काम कर रही है। ओमान के सोहर में मारे गए भारतीयों के शव उनके परिवारों तक पहुंचा दिए गए हैं, और इराक में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने की कोशिश जारी है। कुल मिलाकर, भारत सरकार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और अपने नागरिकों की सुरक्षा को सबसे बड़ी प्राथमिकता दे रही है।
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