नई दिल्ली: देश की सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने एक बड़ी रक्षा खरीद को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के तहत भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमान और भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I पोसीडॉन समुद्री निगरानी विमान खरीदे जाएंगे। इस पूरी डील की अनुमानित लागत करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये बताई जा रही है। इसे भारत की अब तक की सबसे बड़ी रक्षा खरीद योजनाओं में से एक माना जा रहा है।
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114 नए राफेल विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा। इन विमानों से वायुसेना को 6 से 7 नए स्क्वाड्रन मिलेंगे। फिलहाल वायुसेना के पास करीब 30 स्क्वाड्रन हैं, जबकि देश की सुरक्षा जरूरतों के अनुसार 42 स्क्वाड्रन की आवश्यकता मानी जाती है। ऐसे में यह सौदा वायुसेना की घटती स्क्वाड्रन संख्या को संतुलित करने में अहम भूमिका निभाएगा। DAC की मंजूरी के बाद अब यह प्रस्ताव अंतिम स्वीकृति के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) के पास भेजा जाएगा। CCS की मंजूरी मिलने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सिर्फ आसमान ही नहीं, समुद्र में भी भारत की निगरानी क्षमता बढ़ेगी। नौसेना के लिए 6 नए P-8I पोसीडॉन विमान खरीदे जाएंगे। भारतीय नौसेना पहले से 12 P-8I विमानों का संचालन कर रही है। नए विमानों के जुड़ने से हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी और पनडुब्बी रोधी (एंटी-सबमरीन) क्षमता और मजबूत होगी। यह कदम समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक संतुलन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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वायुसेना की लड़ाकू क्षमता में बड़ा इजाफा, समुद्री सुरक्षा और निगरानी में मजबूती, सीमाओं पर तेजी से जवाब देने की क्षमता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक से लैस विमान सेना को मिलेंगे। इस ऐतिहासिक रक्षा सौदे से भारत की थल, जल और नभ- तीनों क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और अधिक सशक्त होने की उम्मीद है। अब सबकी नजर CCS की अंतिम मंजूरी पर है।
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