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दिल्ली जेलों में अप्राकृतिक मौत पर मिलेगा इतने लाख रुपये तक मुआवजा: CM रेखा गुप्ता का ऐलान

Compensation unnatural death Delhi jails

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नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की जेलों में अभिरक्षा (कस्टडी) के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मौतों के मामलों में मृतक कैदियों के निकटतम परिजन अथवा वैधानिक उत्तराधिकारियों को मुआवजा देने की योजना अधिसूचित की है।

इस योजना के तहत विभिन्न परिस्थितियों के अनुसार 5 लाख रुपए से 7.5 लाख रुपए तक की मुआवजा राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप अधिसूचित यह योजना पीड़ित परिवारों को निर्धारित परिस्थितियों में समयबद्ध राहत उपलब्ध कराने के साथ-साथ प्रशासनिक उत्तरदायित्व को और अधिक मजबूत करेगी।

दिल्ली सरकार ने जारी की अधिसूचना 

दिल्ली सरकार के गृह (सामान्य) विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार यह योजना ‘दिल्ली जेलों में कैदियों की मृत्यु होने पर मुआवजा भुगतान योजना 2025’ (स्कीम फॉर पेमेंट ऑफ कम्पनसेशन ऑन अकाउंट ऑफ डेथ ऑफ प्रिजनर्स इन दिल्ली प्रिजन 2025) के नाम से लागू होगी। योजना केवल उन मामलों पर लागू होगी, जिनमें इस योजना की अधिसूचना की तिथि अथवा उसके बाद दिल्ली की किसी भी जेल में किसी कैदी की अप्राकृतिक मृत्यु हुई हो।

अधिसूचना के अनुसार कैदियों के बीच आपसी झगड़े अथवा जेल कर्मियों द्वारा कथित यातना या मारपीट के कारण मृत्यु होने पर मृतक के परिजनों को 7.5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। वहीं, जेल अधिकारियों या कर्मचारियों की ड्यूटी में लापरवाही, चिकित्सा अथवा पैरामेडिकल अधिकारियों की लापरवाही तथा कैदी द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामलों में 5 लाख रुपए का मुआवजा निर्धारित किया गया है।

बीमारी से हुई मृत्यु के मामलों में मुआवजा देय नहीं

अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि प्राकृतिक मृत्यु अथवा बीमारी से हुई मृत्यु के मामलों में मुआवजा देय नहीं होगा। इसके अलावा जेल से फरार होने अथवा वैध अभिरक्षा (हिरासत) से भागने के दौरान हुई मृत्यु और आपदा या विपदा के कारण हुई मृत्यु भी इस योजना के दायरे में शामिल नहीं होगी। योजना के तहत संबंधित जेल अधीक्षक को प्रत्येक मामले में मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, मृत्यु के अंतिम कारण, कैदी के चिकित्सा इतिहास तथा मृत्यु से पूर्व उपलब्ध कराए गए उपचार का विवरण महानिदेशक (कारागार) दिल्ली को भेजना होगा।

अधिसूचना के अनुसार महानिदेशक (कारागार) की अध्यक्षता में गठित समिति इन मामलों की समीक्षा करेगी। समिति में सहायक महानिरीक्षक (कारागार), रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर, उप नियंत्रक (लेखा) तथा विधि अधिकारी भी सदस्य होंगे। समिति की अनुशंसा के आधार पर विभाग के प्रशासनिक सचिव के समक्ष मुआवजा स्वीकृति का प्रस्ताव भेजा जाएगा। अधिसूचना में यह भी प्रावधान किया गया है कि मुआवजा राशि का भुगतान किए जाने के बाद संबंधित जेल अधीक्षक इसकी सूचना राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को देंगे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का बयान

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार कानून के शासन, मानवीय गरिमा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। किसी भी व्यक्ति की अभिरक्षा के दौरान होने वाली अप्राकृतिक मृत्यु अत्यंत गंभीर विषय है और ऐसे मामलों में पारदर्शिता, जवाबदेही तथा विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार का उद्देश्य जेल प्रशासन में पारदर्शिता, संवेदनशीलता और जवाबदेही को मजबूत करना तथा प्रत्येक मामले में विधि के अनुरूप न्याय सुनिश्चित करना है।

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