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Chaitra Navratri 2026: क्यों मनाया जाता है चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व, जानिए कथा और धार्मिक महत्व

chaitra navratri 2026

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Chaitra Navratri 2026: चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होकर नवमी तक चलने वाला चैत्र नवरात्रि का पर्व हिंदू धर्म में विशेष आस्था का प्रतीक माना जाता है। इन नौ दिनों में भक्त देवी के नौ स्वरूपों की विधि-विधान से पूजा करते हैं और उपवास भी रखते हैं। मान्यता है कि इस दौरान माता की आराधना करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है और इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

नवरात्रि की शुरुआत पहले दिन घटस्थापना यानी कलश स्थापना से होती है। इसी के साथ घरों और मंदिरों में अखंड ज्योति जलाई जाती है, जिसे शुभ और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। नौवें दिन राम नवमी का पर्व भी मनाया जाता है, जिसे भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में जाना जाता है।

पौराणिक कथा क्या कहती है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में महिषासुर नामक असुर ने अपने अत्याचारों से पृथ्वी और स्वर्ग लोक में आतंक मचा रखा था। उसे ऐसा वरदान प्राप्त था कि कोई देवता या दानव उसका वध नहीं कर सकता। इससे परेशान होकर सभी देवताओं ने देवी शक्ति से सहायता की प्रार्थना की।

तब देवी ने अपने तेज से विभिन्न रूप धारण किए और देवताओं ने उन्हें अपने-अपने अस्त्र-शस्त्र प्रदान किए। कहा जाता है कि यह दिव्य प्रक्रिया नौ दिनों तक चली, जिसके बाद देवी ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया। इसी विजय के प्रतीक के रूप में नवरात्रि मनाने की परंपरा शुरू हुई।

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नौ दिनों में किन-किन रूपों की पूजा?

नवरात्रि के प्रत्येक दिन देवी दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है। इन नौ रूपों को नवदुर्गा कहा जाता है-

पहला दिन: शैलपुत्री
दूसरा दिन: ब्रह्मचारिणी
तीसरा दिन: चंद्रघंटा
चौथा दिन: कूष्मांडा
पांचवां दिन: स्कंदमाता
छठा दिन: कात्यायनी
सातवां दिन: कालरात्रि
आठवां दिन: महागौरी
नौवां दिन: सिद्धिदात्री

नवरात्रि के समापन पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है, जिसमें छोटी बालिकाओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका सम्मान किया जाता है और उन्हें भोजन कराया जाता है।

साल में कितनी बार आती है नवरात्रि?

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, साल में चार बार नवरात्रि आती है चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ में। हालांकि, इनमें से चैत्र और अश्विन नवरात्रि को सबसे अधिक प्रमुखता दी जाती है, जबकि अन्य दो नवरात्रि मुख्यतः साधना और तांत्रिक उपासना के लिए मानी जाती हैं।

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(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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