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हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 03 मई 2026

Hukamnama 3 May 2026

Hukamnama 3 May 2026

Hukamnama : सूही महला १ ॥ जिउ आरणि लोहा पाइ भंनि घड़ाईऐ॥ तिउ साकतु जोनी पाइ भवै भवाईऐ ॥१॥ बिनु बूझे सभु दुखु दुखु कमावणा ॥ हउमै आवै जाइ भरमि भुलावणा ॥१॥ रहाउ ॥ तूं गुरमुखि रखणहारु हरि नामु धिआईऐ ॥ मेलहि तुझहि रजाइ सबदु कमाईऐ ॥२॥

अर्थ : जैसे भठ्ठी में लोहा डाल कर (और) गला कर (नये तौर) से बनाया जाता है (लोहे के काम आने वाली चीजें बनाई जाती है)उसी प्रकार माया के मोह में फसा जीव, जनम मरण के फेर में घूमता रहता है (और आखिर में गुरु की कृपा द्वारा सुमति सीखता है।१। (सही जीवन) की समझ के बिना मनुख (जो भी) कर्म करता है (दुःख पैदा करने वाले करता है) दुःख ही दुःख (एकत्र करता ) है। अहंकार के कारण मनुख जनम मरण के चक्कर में फसा रहता है, और भटकन में आ के गलत रस्ते पर ही रहता है।१।रहाउ। हे प्रभु! (भटक भटक कर आखिर ) जो मनुख गुरु की शरण पड़ता है तो तूँ उसको (चौरासी के चक्र से बचा लेता है, वह, हे प्रभु! तेरा नाम सुमिरन करता है। गुरु (भी तू अपनी रजा अनुसार मिलाता है ( जिस को मिलाता है) वह गुरु के शबद को कमाता है ( गुरु के शबद के अनुसार आचरण बनाता है)॥२॥

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