Last Updated: October 30, 2026

Dainik Savera Times Logo

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 20 अप्रैल 2025

April 20, 2025

हुक्मनामा श्री हरमंदिर साहिब जी 20 अप्रैल 2025

Hukamnama: धनासरी महला ३ ॥ नावै की कीमति मिति कही न जाइ ॥ से जन धंनु जिन इक नामि लिव लाइ ॥ गुरमति साची साचा वीचारु ॥ आपे बखसे दे वीचारु ॥१॥ हरि नामु अचरजु प्रभु आपि सुणाए ॥ कली काल विचि गुरमुखि पाए ॥१॥ रहाउ ॥ हम मूरख मूरख मन माहि ॥ हउमै विचि सभ कार कमाहि ॥ गुर परसादी हंउमै जाइ ॥ आपे बखसे लए मिलाइ ॥२॥ बिखिआ का धनु बहुतु अभिमानु ॥ अहंकारि डूबै न पावै मानु ॥ आपु छोडि सदा सुखु होई ॥ गुरमति सालाही सचु सोई ॥३॥ आपे साजे करता सोइ ॥ तिसु बिनु दूजा अवरु न कोइ ॥ जिसु सचि लाए सोई लागै ॥ नानक नामि सदा सुखु आगै ॥४॥८॥

अर्थ :-हे भाई ! परमात्मा का नाम हैरान करने वाली ताकत वाला है। (पर यह नाम) भगवान आप ही (किसी वड-भागी को) सुनाता है। इस झगिड़आँ-भरे जीवन-समे में वही मनुख हरि-नाम प्राप्त करता है जो गुरु के सनमुख रहता है।1।रहाउ। हे भाई ! यह नहीं बताया जा सकता कि परमात्मा का नाम किस मुल्य से मिल सकता है और यह नाम कितनी ताकत वाला है। जिन मनुष्यों ने परमात्मा के नाम में सुरति जोड़ी हुई है वह किस्मत वाले हैं। जो मनुख कभी उकाई ना खाने वाली गुरु की मति ग्रहण करता है, वह मनुख सदा-थिर भगवान के गुणों की विचार (आपने अंदर) बसाता है। पर यह विचार भगवान उस को ही देता है जिस ऊपर आप ही बख्शश करता है।1।

हे भाई ! हम जीव (अपना) हरेक काम हऊमै के आसरे ही करते हैं, (सो जो हम आपने) मन में (ध्यान के साथ विचारें तो इस हऊमै के कारण) हम निरोल मूर्ख हूँ। यह हऊमै (हमारे अंदर से) गुरु की कृपा के साथ ही दूर हो सकती है। (गुरु भी उसे को) मिलाता है जिस ऊपर भगवान आप ही कृपा करता है।2। (हे भाई ! यह दुनिया वाला) माया का धन (मनुख के मन में) बड़ा अहंकार (पैदा करता है)। और, जो मनुख अहंकार में डुबा रहता है वह (भगवान की हजूरी में) आदर नहीं पाता। हे भाई ! आपा-भाव छोड़ के सदा आत्मिक आनंद बना रहता है।

हे भाई ! मैं तो गुरु की मति ले के उस सदा-थिर भगवान की सिफ़त-सालाह करता रहता हूँ।3। हे भाई ! वह करतार आप ही (सारी सृष्टि को) पैदा करता है, उस के बिना कोई ओर (इस प्रकार की अवस्था वाला) नहीं है। वह करतार जिस मनुख को (आपने) सदा-थिर नाम में जोड़ता है, वही मनुख (नाम-सुमिरन में) लगता है। हे नानक ! जो मनुख नाम में लगता है उस को सदा ही आत्मिक आनंद बना रहता है (इस लोक में भी, और) परलोक में भी।4।8।

ये भी पढ़ें: जनता के विरोध प्रदर्शन के आगे झुकी पाकिस्तान सरकार, कम किए पेट्रोल के दाम

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें