Jyeshtha Adhik Purnima 2026: आज ज्येष्ठ अधिक मास की पूर्णिमा श्रद्धालुओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व लेकर आई है। हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास में पड़ने वाली पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक इस दिन स्नान, व्रत, दान और भगवान विष्णु की आराधना करने से जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का आगमन होता है।
अधिक मास की पूर्णिमा का विशेष महत्व
इस वर्ष ज्येष्ठ मास में अधिक मास होने के कारण दो पूर्णिमा तिथियां पड़ रही हैं। धर्म शास्त्रों में अधिक मास को भगवान विष्णु को समर्पित माना गया है, इसलिए इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का फल कई गुना बढ़ जाता है। ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा पर किए गए पुण्य कर्म व्यक्ति के आध्यात्मिक और पारिवारिक जीवन दोनों के लिए लाभकारी माने जाते हैं।
स्नान और पूजा का मिलेगा विशेष फल
मान्यता है कि इस दिन गंगा, यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। जो लोग तीर्थस्थल नहीं जा सकते, वे घर पर पवित्र जल से स्नान कर भगवान विष्णु और चंद्रदेव की पूजा कर सकते हैं। संध्या वंदन, जप और ध्यान भी इस दिन विशेष फलदायी माने गए हैं।
दान का है खास महत्व
ज्येष्ठ मास की गर्मी को देखते हुए जल से भरपूर वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ माना गया है। श्रद्धालु तरबूज, खरबूजा, खीरा, शीतल पेय पदार्थ या गन्ने के रस का दान कर सकते हैं। इसके अलावा जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना और मालपुए का दान करना भी शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे परिवार में खुशहाली बनी रहती है और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं।
विवाहित महिलाओं के लिए विशेष दिन
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा विवाहित महिलाओं के लिए भी विशेष महत्व रखती है। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से व्रत और पूजा करती हैं। माना जाता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए पूजन से दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहती है।
स्नान-दान के शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:34 बजे से 5:17 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:10 बजे से 1:03 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 2:48 बजे से 3:41 बजे तक
इन शुभ समयों में स्नान, पूजा और दान करना विशेष फलदायी माना गया है।
वास्तु दोष दूर करने का उपाय
धार्मिक परंपराओं के अनुसार यदि घर में वास्तु संबंधी समस्याएं महसूस हो रही हों तो ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन वट वृक्ष का पौधा लगाना शुभ माना जाता है। पौधे की नियमित सेवा करने और बाद में उसे किसी मंदिर या जल स्रोत के पास स्थापित करने से नकारात्मक प्रभावों में कमी आने की मान्यता है।
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आध्यात्मिक उन्नति का अवसर
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मचिंतन, सेवा और दान के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने का अवसर भी प्रदान करती है। श्रद्धा और भक्ति के साथ किए गए पुण्य कार्य व्यक्ति को मानसिक शांति, आध्यात्मिक संतोष और सामाजिक सम्मान दिलाने में सहायक माने जाते हैं।

