नई दिल्ली: हर वर्ष भाद्रपद पूर्णिमा के बाद शुरू होने वाले पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) का विशेष महत्व होता है। यह वह पावन काल है जब लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं। वर्ष 2025 में पितृ पक्ष की शुरुआत 7 सितंबर से होगी और इसका समापन 21 सितंबर को अमावस्या के दिन होगा।
पहला श्राद्ध कब है?
इस बार प्रतिपदा श्राद्ध 8 सितंबर 2025, सोमवार को मनाया जाएगा। प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 7 सितंबर को रात 11:38 बजे से होगी और इसका समापन 8 सितंबर को रात 9:11 बजे होगा। इस दिन वे लोग श्राद्ध करते हैं जिनके पितरों का देहांत चंद्र मास की प्रतिपदा तिथि को हुआ था।
पहले श्राद्ध का शुभ मुहूर्त
श्राद्ध करने के लिए दिन का मध्याह्न काल सबसे शुभ माना जाता है। इसके साथ ही “कुतुप” और “रौहिण” मुहूर्त भी विशेष फलदायी होते हैं।
कुतुप मुहूर्त: सुबह 11:09 बजे से 11:59 बजे तक
रौहिण मुहूर्त: सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक
अपराह्न काल: दोपहर 12:49 बजे से 3:18 बजे तक

किनका होता है प्रतिपदा श्राद्ध?
प्रतिपदा तिथि को उन पितरों का श्राद्ध किया जाता है जिनका देहांत चंद्र मास की प्रतिपदा को हुआ हो। यह दिन पितरों के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है और माना जाता है कि विधिपूर्वक किया गया श्राद्ध उन्हें शांति और मोक्ष की ओर ले जाता है।
घर पर श्राद्ध कैसे करें?
पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करना एक सरल लेकिन भावनात्मक और धार्मिक प्रक्रिया होती है। जानिए इसकी संक्षिप्त विधि:
आवश्यक सामग्री:
तिल, जौ, कुशा, गंगाजल
शुद्ध शाकाहारी भोजन: खीर, पूड़ी, चावल, दाल, मिठाई, फल
दीपक, धूप, तांबे का पात्र
श्राद्ध की विधि:
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
श्राद्ध स्थल को शुद्ध कर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके बैठें।
एक तांबे के पात्र में गंगाजल, तिल और जौ मिलाकर तर्पण करें – पितरों का नाम और गोत्र लेते हुए।
भोजन को एक थाली में परोसकर पितरों को भोग लगाएं।
गाय, कौआ और कुत्ते को भोजन देना अति आवश्यक माना जाता है।
“ॐ पितृभ्यः नमः” मंत्र का जप करें।
अंत में किसी ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन कराकर वस्त्र व दक्षिणा दें।
श्राद्ध का महत्व
मान्यता है कि पितृ पक्ष में श्राद्ध और तर्पण करने से पितरों की आत्मा को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद घर-परिवार को सुख, समृद्धि और शांति प्रदान करता है। इसे पितरों के ऋण से मुक्ति का उपाय भी कहा गया है।