Last Updated: September 20, 2026

Dainik Savera Times Logo

Jagannath Rath Yatra 2026 : इस साल कब निकलेगी पुरी में महाप्रभु की भव्य रथयात्रा? जानें सही तारीख और महत्व

June 9, 2026

Jagannath Rath Yatra 2026 : इस साल कब निकलेगी पुरी में महाप्रभु की भव्य रथयात्रा? जानें सही तारीख और महत्व

Puri Rath Yatra 2026 Date : ओडिशा के पवित्र नगर पुरी में स्थित जगन्नाथ मंदिर, पुरी न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि यहां आयोजित होने वाली जगन्नाथ रथ यात्रा को विश्व के सबसे भव्य और आध्यात्मिक उत्सवों में मिलता जाता है। बता दें कि हर वर्ष आषाढ़ माह में जब भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथों पर सवार होकर नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं, तो पूरा पुरी शहर भक्तिमय वातावरण में डूब जाता है। लाखों श्रद्धालु देश-विदेश से इस दिव्य दृश्य के साक्षी बनने पहुंचते हैं, जहां भक्ति, परंपरा और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। तो आइए ख़बर में विस्तार से जानते हैं पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा की सही तिथि और महत्व…

2026 में रथ यात्रा कब है?

पंचांग के अनुसार रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2026 में यह शुभ तिथि 15 जुलाई को देर सुबह शुरू होकर 16 जुलाई की सुबह तक रहेगी। इसी आधार पर मुख्य रथ यात्रा 16 जुलाई 2026 को निकाली जाएगी।

यह भव्य उत्सव आमतौर पर कई दिनों तक चलता है और इसका समापन 24 जुलाई 2026 को बहुदा यात्रा के साथ माना जा रहा है, जब भगवान वापस अपने मूल मंदिर में लौटते हैं।

ये भी पढ़ें:

रथ यात्रा का धार्मिक महत्व

मान्यता है कि इस पवित्र यात्रा में रथ खींचने या दर्शन करने से भक्तों को अत्यंत पुण्य प्राप्त होता है। इसे कई शास्त्रों में अत्यधिक शुभ कार्य माना गया है, जो साधक के जीवन में सुख-समृद्धि और आध्यात्मिक शांति लाने वाला बताया जाता है।

इस उत्सव की एक खास बात यह भी है कि पुरी में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की मूर्तियाँ पारंपरिक रूप से काष्ठ (लकड़ी) से निर्मित होती हैं, जो इसे अन्य मंदिर परंपराओं से अलग बनाती हैं।

ये भी पढ़ें:

परंपराएँ और विशेषताएँ

रथ यात्रा के दौरान विशाल रथों का निर्माण बिना लोहे की कीलों के पारंपरिक तकनीक से किया जाता है। इन्हें पूरी तरह भक्तों द्वारा रस्सियों की मदद से खींचा जाता है। यात्रा मार्ग की सफाई विशेष रूप से की जाती है और कुछ परंपराओं के अनुसार इसे अत्यंत पवित्र माना जाता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

खबरें और भी हैं...

Copyright © 2025 Dainik Savera Times. All rights reserved.
ऐप खोलें