
धर्म डेस्क : हिंदू धर्म में शनिवार का दिन भगवान शनिदेव की उपासना के लिए विशेष माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिदेव को कर्मों का न्याय करने वाला देवता कहा जाता है, जो व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। इसलिए इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उनकी पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि विधिपूर्वक पूजा-अर्चना करने से शनि से जुड़े कष्टों में राहत मिल सकती है और जीवन में सकारात्मकता आती है।
तेल अर्पित करने की पारंपरिक विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार को शनिदेव को सरसों का तेल अर्पित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। पूजा के दौरान उनकी प्रतिमा के ठीक सामने खड़े होने के बजाय थोड़ा दाएं या बाएं खड़े होकर चरणों की ओर दृष्टि रखते हुए तेल अर्पित करना शुभ माना जाता है।
तेल चढ़ाने के बाद सरसों के तेल का दीपक जलाने की भी परंपरा है। कई लोग दीपक में काले तिल डालकर उसे प्रज्वलित करते हैं, जिसे शुभ संकेत माना जाता है। इस दौरान श्रद्धा के साथ “ॐ शं शनैश्चराय नमः” मंत्र का जाप करने की भी मान्यता है।
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दान-पुण्य का भी है विशेष महत्व
पूजा के उपरांत जरूरतमंद लोगों को काला तिल, उड़द की दाल या काले रंग के वस्त्र का दान करना पुण्यकारी माना जाता है। इसके अलावा कई श्रद्धालु शनिवार की शाम पीपल के पेड़ के नीचे तिल या सरसों के तेल का दीपक भी जलाते हैं।
शनिवार को किन कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शनिवार के दिन लोहे से बनी वस्तुओं और सरसों के तेल की खरीदारी से बचना चाहिए। साथ ही तामसिक भोजन का सेवन न करने, बाल और नाखून न काटने तथा गरीब, बुजुर्ग, महिलाओं और असहाय लोगों का सम्मान करने की सलाह दी जाती है।
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शनिवार को क्या करना शुभ माना जाता है
शनिदेव की पूजा के साथ भगवान हनुमान की आराधना भी इस दिन विशेष फलदायी मानी जाती है। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड या बजरंग बाण का पाठ करने की परंपरा भी प्रचलित है। इसके अलावा सुबह पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना और शाम को उसके नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार काले कुत्ते को रोटी खिलाना और चींटियों को आटा डालना भी पुण्यदायक माना जाता है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)