Sheetala Ashtami 2026 Date And Time: हिंदू धर्म में शीतला अष्टमी का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इसे कई स्थानों पर बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भक्त शीतला माता की आराधना करते हैं। मान्यता है कि माता शीतला की पूजा करने से विशेष रूप से गर्मियों में फैलने वाली बीमारियों से रक्षा होती है और घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन माता को ठंडे और एक दिन पहले बने भोजन का भोग लगाया जाता है।
शीतला अष्टमी 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में शीतला अष्टमी का पर्व बुधवार, 11 मार्च 2026 को मनाया जाएगा।
पूजा का शुभ समय: सुबह 6:36 बजे से शाम 6:27 बजे तक
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 11 मार्च 2026, रात 1:54 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 12 मार्च 2026, सुबह 4:19 बजे
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इस दिन श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से माता शीतला की पूजा करते हैं और परिवार की खुशहाली की कामना करते हैं।
शीतला अष्टमी पूजा विधि
शीतला अष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर ठंडे पानी से स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके बाद नदी, तालाब या घर में ही साफ स्थान पर माता शीतला की प्रतिमा स्थापित की जाती है। प्रतिमा के पास ठंडे पानी से भरा कलश रखना भी आवश्यक माना जाता है।
पूजा के दौरान माता का श्रृंगार किया जाता है और उन्हें लाल रंग के वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद भक्त शीतला अष्टकम और व्रत कथा का पाठ करते हैं। कई स्थानों पर पूजा में सोलह प्रकार की सामग्री चढ़ाने की परंपरा भी निभाई जाती है।
शीतला अष्टमी की खास परंपरा यह है कि इस दिन घर में आग नहीं जलाई जाती। इसलिए लोग एक दिन पहले ही भोजन बनाकर रख लेते हैं और उसी बासी भोजन को माता को भोग लगाकर प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।
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शीतला अष्टमी का भोग
इस दिन माता को ठंडे और पहले से बने व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। भोग में आमतौर पर दही, पुए और मीठे चावल शामिल होते हैं। इसके अलावा नमकपारे, रोटी, शक्कर की रोटी, बाजरे के व्यंजन, फीकी पूड़ी या पकौड़ियां भी श्रद्धा के अनुसार चढ़ाई जाती हैं।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

