Pradosh Vrat 2026: आज माघ मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है, जिसे सनातन परंपरा में प्रदोष व्रत के रूप में मनाया जाता है। विशेष बात यह है कि यह त्रयोदशी शुक्रवार के दिन पड़ रही है, इसलिए इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जा रहा है। मान्यता है कि शुक्रवार को किया गया प्रदोष व्रत भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती की विशेष कृपा दिलाता है और दांपत्य जीवन को सुखमय बनाता है।
शुक्र प्रदोष व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल सायंकाल 5 बजकर 43 मिनट से रात 8 बजकर 19 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में शिव-पार्वती की पूजा करना अत्यंत फलदायी माना गया है। कुल मिलाकर श्रद्धालुओं को लगभग 2 घंटे 36 मिनट का शुभ समय प्राप्त होगा।

शुक्र प्रदोष व्रत की सरल पूजा विधि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रदोष व्रत में दिन में दो बार भगवान शिव का पूजन करना श्रेष्ठ माना जाता है।
प्रातःकाल: स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
प्रदोष काल में: सूर्यास्त के बाद शुद्ध मन और शरीर से भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करें।
पूजा में सबसे पहले शिवलिंग पर गंगाजल या जल अर्पित करें। इसके बाद बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, भांग, फल-फूल, धूप-दीप और नैवेद्य अर्पित करें। प्रदोष व्रत की कथा का पाठ या श्रवण करें और रुद्राक्ष की माला से शिव मंत्र का जप करें। अंत में भगवान शिव की आरती कर प्रसाद वितरित करें।
शुक्र प्रदोष व्रत की पौराणिक कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार एक नगर में एक निर्धन विधवा ब्राह्मणी रहती थी, जो भिक्षा पर जीवन यापन करती थी। एक दिन उसकी भेंट विदर्भ देश के एक दुखी राजकुमार से हुई, जो अपने राज्य से वंचित हो गया था। ब्राह्मणी ने उसे पुत्रवत आश्रय दिया। बाद में शांडिल्य ऋषि के मार्गदर्शन से उस ब्राह्मणी ने प्रदोष व्रत करना शुरू किया। भगवान शिव की कृपा से उसकी दरिद्रता दूर हुई और राजकुमार को भी अपना खोया हुआ राजपाट पुनः प्राप्त हुआ। यह कथा प्रदोष व्रत की महिमा को दर्शाती है।
ये भी पढ़ें: आज इन 2 राशियों की चमकेगी किस्मत! नौकरी में पदोन्नति के साथ-साथ परिवार में हर्षोल्लास भी
सप्ताह के अनुसार प्रदोष व्रत का फल
रवि प्रदोष – आरोग्य, दीर्घायु और सौभाग्य
सोम प्रदोष – मनोकामनाओं की पूर्ति
मंगल प्रदोष – रोग और कष्टों से मुक्ति
बुध प्रदोष – बुद्धि और कार्यसिद्धि
गुरु प्रदोष – शत्रु बाधा से मुक्ति और समृद्धि
शुक्र प्रदोष – सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन में मधुरता
शनि प्रदोष – संतान सुख और सर्वांगीण कल्याण
ये भी पढ़ें: Petrol Diesel Price: सस्ता हुआ पेट्रोल-डीजल! टंकी फुल कराने से पहले जान लें आज के नए दाम
प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
शास्त्रों के अनुसार प्रदोष व्रत करने से साधक पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से चंद्रमा को क्षय रोग से मुक्ति मिली थी। कहा जाता है कि प्रदोष व्रत करने से 100 गायों के दान के समान पुण्य प्राप्त होता है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।
डिस्क्लेमर: यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और ग्रंथों पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है।