Last Updated: October 1, 2026

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आज रखा जाएगा सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत, जानिए कथा और पूजा विधि

August 5, 2025

आज रखा जाएगा सावन का आखिरी मंगला गौरी व्रत, जानिए कथा और पूजा विधि

Sawan Last Mangla Gauri Vrat :  सावन महीने में जहां सोमवार का दिन भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है, वहीं मंगलवार को मां मंगला गौरी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। आज श्रावण महीने का अंतिम मंगला गौरी व्रत है। यह दिन विशेष रूप से सुहागिन महिलाओं और कुंवारी कन्याओं के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। सावन के महीने में पड़ने वाला आज आखिरी मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है, आइए इस व्रत से जुड़ी कथा, पूजा विधि और नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं…

मंगला गौरी व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में मान्यता है कि मां मंगला गौरी की पूजा से सुहाग की रक्षा, पति की दीर्घायु, और मनचाहा वर प्राप्त होता है। जो महिलाएं सच्चे मन से इस व्रत को करती हैं, उन्हें अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत से मंगल दोष जैसे ग्रहों के कुप्रभाव भी समाप्त हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।

पूजा विधि: ऐसे करें मंगला गौरी की आराधना

प्रातःकाल स्नान कर पवित्र भाव से व्रत का संकल्प लें।
माता की मूर्ति या चित्र के सामने लाल वस्त्र, पुष्प, और दीपक अर्पित करें।
पूजा में विशेष रूप से 16 वस्तुएं चढ़ाने का नियम है जैसे 16 फल, 16 फूल, 16 श्रृंगार की चीजें।
माता की कथा का पाठ करें और अंत में धूप, दीप और आरती से पूजा पूर्ण करें।

व्रत कथा: कैसे मंगला गौरी ने बचाई एक नवविवाहित का सुहाग

धार्मिक कथा के अनुसार, एक धर्मपाल नामक व्यापारी को सब सुख प्राप्त थे, परंतु संतान नहीं थी। वर्षों बाद उसे पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई, लेकिन ज्योतिषियों ने बताया कि पुत्र की मृत्यु सांप के काटने से कम उम्र में हो जाएगी।

धर्मपाल ने अपने पुत्र का किशोरावस्था में विवाह कर दिया। उसकी बहू मां मंगला गौरी की अनन्य भक्त थी। वह हर मंगलवार व्रत रखकर विधिपूर्वक माता की पूजा करती थी। माता ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर उसके पति को अखंड सौभाग्य का वरदान दिया और उसकी मृत्यु टल गई। इसके बाद वह दंपती दीर्घकाल तक सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करते रहे।

व्रत के दिन करें यह उपाय

–आज मंगला गौरी व्रत के दिन माता को मीठा भोग लगाने का विशेष महत्व है।
–16 लाल पेड़े या सिंहाड़े के आटे से बना हलवा माता को चढ़ाएं।
–इससे मां प्रसन्न होती हैं और शीघ्र आशीर्वाद प्रदान करती हैं।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. दैनिक सवेरा टाइम्स इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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