Sawan Pradosh Vrat 2025 नई दिल्ली: सनातन धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व बताया गया है, और जब यह व्रत सावन मास में आता है, तो इसका धार्मिक प्रभाव और भी अधिक बढ़ जाता है। सावन मास भगवान शिव को समर्पित होता है, और इस महीने के प्रदोष व्रत में शिव भक्ति करने से भक्तों के समस्त कष्ट दूर होते हैं।
प्रदोष व्रत: क्या है महत्व?
प्रदोष व्रत हर महीने दो बार आता है एक शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को और दूसरा कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को। इस दिन प्रदोष काल में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होकर सभी पापों का नाश कर देते हैं।
सावन प्रदोष व्रत 2025 की तिथि और मुहूर्त
तिथि प्रारंभ: 6 अगस्त 2025, दोपहर 02:08 बजे से
तिथि समाप्ति: 7 अगस्त 2025, दोपहर 02:27 बजे तक
व्रत रखने की तिथि: 6 अगस्त 2025 (बुधवार)
प्रदोष काल में पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 07:08 बजे से रात 09:16 बजे तक
इस कारण इसे बुध प्रदोष व्रत भी कहा जाता है।
प्रदोष व्रत की पूजा विधि
1. व्रती को दिनभर उपवास रखना चाहिए और शाम को स्नान कर शिव मंदिर या घर में शिवलिंग के सामने पूजा करनी चाहिए।
2. भगवान शिव को अर्पित करें:
गंगाजल, गाय का दूध, रुद्राक्ष, भस्म, अक्षत, बेलपत्र, भांग, धतूरा।
3. महामृत्युंजय मंत्र का जप करें: “ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगंधिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥”
4. अंत में शिव जी की आरती करें और प्रसाद वितरण करें।
कौन-सा फूल चढ़ाना चाहिए?
सावन के अंतिम प्रदोष पर धतूरे का फूल और उसका फल शिवलिंग पर चढ़ाना अत्यंत शुभ माना गया है। यह फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है और इसे चढ़ाने से पापों का नाश होता है व मोक्ष की प्राप्ति होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। दैनिक सवेरा टाइम्स एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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